बिजली कटौती पर संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने रखा सरकार का पक्ष।

अमित नौटियाल – संवाददाता 

देहरादून – अंतराष्ट्रीय बाजार में कोयले की भारी डिमांड व पूर्ति न होने के कारण बिजली कटौती हुई, कोयले की कमी के कारण बिजली उत्पादन घटा व डिमांड बढ़ी, गैस संयंत्रों से भी समुचित बिजली उत्पादन नहीं हो रहा था। बिजली की दरें पिछले 3 माह से लगातार बढ़ी हैं। अप्रैल माह में बिजली की मांग बढ़ी है। केंद्र के हस्तक्षेप के बाद मेघालय से राज्य को बिजली आवंटित की गई, कोटा से भी बिजली राज्य को आवंटित की गई, ऊर्जा निगमों में निदेशकों व अन्य अधिकारियों के पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया गतिमान है।

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भारत सरकार द्वारा सोलर प्लांटों को लगाने पर सब्सिडी दी जा रही है। बिजली की दरों के निर्धारण का अधिकार विधुत नियामक आयोग को उत्तराखंड का बिजली टैरिफ अन्य राज्यों के मुकाबले बेहद कम है। विपक्ष ने सरकार के जवाब पर किये सवाल खड़े।

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