विश्व गुरु बनने की राह पर भारत—दून में नीति, तकनीक और जनभागीदारी पर मंथन।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
देहरादून के सर्वे चौक स्थित ऑडिटोरियम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र, चिंतन रिसर्च फाउंडेशन तथा Indian Institute of Public Administration के संयुक्त तत्वावधान में “भारत: विश्व गुरु की राह पर” विषय पर उच्चस्तरीय विचार गोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने की, जबकि संचालन एन. रविशंकर ने किया। इस दौरान Smarter than the Storm पुस्तक का विमोचन भी हुआ, जिसके लेखक अमिताभ कांत हैं।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए अमिताभ कांत ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तकनीक, कनेक्टिविटी और नीतिगत सुधारों के जरिए वैश्विक स्तर पर मजबूत पहचान बनाई है। उन्होंने “Zero Defect, Zero Effect” को अपनाने, स्किल डेवलपमेंट और रिसर्च को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
वहीं शिशिर प्रियदर्शी ने ‘विश्व गुरु’ बनने के दावे के बजाय निरंतर सुधार और आत्ममंथन पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने गुणवत्ता और विश्वसनीयता को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता की कुंजी बताया।
मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने कहा कि जनभागीदारी के बिना विकास संभव नहीं है। उन्होंने उत्तराखंड की ग्रीन इकोनॉमी, पर्यटन, हेल्थ और वेलनेस सेक्टर को राज्य की ताकत बताते हुए युवाओं की भूमिका को अहम बताया।
राजीव खेर ने वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की रणनीतिक क्षमता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुणवत्ता आधारित प्रतिस्पर्धा ही देश को आगे ले जाएगी।
वहीं शंकर अग्रवाल ने शहरों को आर्थिक विकास का केंद्र बताते हुए स्मार्ट अर्बन प्लानिंग, बेहतर जल आपूर्ति, स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया।
गोष्ठी में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि “विश्व गुरु” बनने के लिए भारत को निरंतर सुधार, नवाचार, गुणवत्ता और जनभागीदारी के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में वरिष्ठ सेवानिवृत्त नौकरशाहों और आम नागरिकों ने भाग लिया।


















