उत्तराखंड में ‘जनगणना 2027’ की शुरुआत, डिजिटल स्व-गणना से बना नया इतिहास।

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उत्तराखंड में ‘जनगणना 2027’ की शुरुआत, डिजिटल स्व-गणना से बना नया इतिहास।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

उत्तराखंड में ‘जनगणना 2027’ के प्रथम चरण का शुक्रवार को औपचारिक शुभारंभ हो गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डिजिटल माध्यम से ‘स्व-गणना’ (Self-Enumeration) कर अभियान की शुरुआत की। इस दौरान कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी उपस्थित रहे।

प्रथम चरण के तहत प्रदेश में ‘मकानसूचीकरण एवं हाउसिंग जनगणना’ का कार्य शुरू हो गया है। इस बार डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत पहली बार नागरिकों को ऑनलाइन स्व-गणना की सुविधा दी गई है, जिसके माध्यम से वे जनगणना अधिकारी के घर आने से पहले स्वयं अपनी जानकारी पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं।

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स्व-गणना की यह सुविधा 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक गणना कर्मी घर-घर जाकर आंकड़े एकत्र करेंगे। इस कार्य के लिए प्रदेशभर में लगभग 30,000 प्रगणक और पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं।

इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना के माध्यम से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, जिससे आंकड़ों की सटीकता सुनिश्चित हो सके।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि जनगणना से प्राप्त आंकड़े सरकार को बेहतर नीतियां बनाने और योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद करेंगे। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘प्रगति’ और ‘विकास’ शुभंकर के साथ इस अभियान से जुड़ने की अपील की।

जनगणना के प्रथम चरण में नागरिकों से मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं जैसे बिजली, पानी, शौचालय आदि से जुड़े कुल 33 प्रश्न पूछे जाएंगे। स्व-गणना करने वाले नागरिकों को एक विशेष SE ID प्रदान की जाएगी, जिसे गणना कर्मी के आने पर दिखाना अनिवार्य होगा।

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कार्यक्रम में भारत सरकार, गृह मंत्रालय की जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव सहित उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

सरकार ने प्रदेश की जनता से जनगणना कार्य में पूर्ण सहयोग करने और स्व-गणना सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है, ताकि राज्य के विकास के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें।