अंधविश्वास के खिलाफ वन विभाग की सख्ती, उल्लुओं की सुरक्षा के लिए गश्त तेज।

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अंधविश्वास के खिलाफ वन विभाग की सख्ती, उल्लुओं की सुरक्षा के लिए गश्त तेज।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही अंधविश्वास के चलते उल्लुओं के शिकार का खतरा बढ़ जाता है। कई लोग तांत्रिक क्रियाओं और अमीर बनने के लालच में उल्लुओं की बलि देते हैं। इसे देखते हुए वन विभाग सतर्क हो गया है और जंगलों में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को रोका जा सके।

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तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि उल्लुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष अलर्ट जारी किया गया है। उन्होंने कहा, “हमने अपने सभी वनकर्मियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी हैं और दिवाली के बाद ही उन्हें अवकाश मिलेगा। जंगलों में गश्त तेज कर दी गई है ताकि कोई शिकारी या तांत्रिक उल्लुओं का शिकार न कर सके।”

 

अंधविश्वास का शिकार बनते उल्लू

दिवाली के दौरान तंत्र-मंत्र से जुड़े अंधविश्वासी लोग उल्लुओं को मारकर अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने का प्रयास करते हैं। यह प्रथा न केवल अवैध है, बल्कि यह संकटग्रस्त प्रजाति के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है।

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वन विभाग का कहना है कि इस वर्ष उल्लुओं की रक्षा के लिए विशेष निगरानी टीमें बनाई गई हैं, जो रात-दिन जंगलों में गश्त करेंगी। विभाग ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दी जाए।

सरकार भी चिंतित

वन विभाग के साथ ही राज्य सरकार भी इस मुद्दे पर गंभीर है। अधिकारियों का कहना है कि अंधविश्वास के कारण न केवल वन्यजीवों की हत्या हो रही है, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुँचता है। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी कुप्रथाओं से दूर रहें और त्योहारों को जिम्मेदारी से मनाएं।

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इस दिवाली पर देखना होगा कि वन विभाग की सतर्कता और जागरूकता अभियान कितनी सफलता दिलाते हैं और क्या हम उल्लुओं को अंधविश्वास की बलि चढ़ने से बचा पाते हैं।