शिक्षा के मंदिर में नियमों की बलि! परीक्षा के बीच सरकारी कॉलेज में प्राइवेट अस्पताल का अवैध कब्जा।

शिक्षा के मंदिर में नियमों की बलि! परीक्षा के बीच सरकारी कॉलेज में प्राइवेट अस्पताल का अवैध कब्जा।
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शिक्षा के मंदिर में नियमों की बलि! परीक्षा के बीच सरकारी कॉलेज में प्राइवेट अस्पताल का अवैध कब्जा।

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक


काशीपुर के प्रतिष्ठित राधे हरि राजकीय महाविद्यालय में आज जो तस्वीर सामने आई, वह शिक्षा व्यवस्था और प्रशासन—दोनों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।
एक तरफ परीक्षा हॉल में छात्र-छात्राएं अपना भविष्य लिख रहे थे, तो दूसरी तरफ उसी सरकारी कॉलेज परिसर में एक प्राइवेट अस्पताल “उजाला हॉस्पिटल” ने बिना अनुमति अपना तंबू गाड़कर निशुल्क चिकित्सा कैंप के नाम पर प्रचार शुरू कर दिया।

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सबसे गंभीर सवाल यह है कि परीक्षा जैसे संवेदनशील समय में, एक निजी संस्था को सरकारी शिक्षण संस्थान के भीतर प्रवेश की अनुमति किसने दी?
सूत्रों का दावा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे छात्र संघ अध्यक्ष का रसूख और नेटवर्क काम कर रहा था, ताकि प्राइवेट अस्पताल को छात्रों और आम लोगों का कीमती व्यक्तिगत डेटा उपलब्ध कराया जा सके।


जानकारी के मुताबिक उजाला हॉस्पिटल द्वारा लगाए गए कैंप में बड़ी संख्या में लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और पते दर्ज किए जा रहे थे। यह सीधे तौर पर डेटा गोपनीयता कानूनों और सरकारी नियमों का उल्लंघन है।
हैरानी की बात यह है कि यह सब कॉलेज प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा था, लेकिन किसी ने रोकने की ज़रूरत नहीं समझी।

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सबसे चौंकाने वाला बयान कॉलेज की प्राचार्या डॉ. सुमिता श्रीवास्तव का सामने आया, जिन्होंने कहा कि उन्हें इस पूरे कैंप की कोई जानकारी नहीं थी और न ही किसी प्रकार की अनुमति दी गई थी।

अब सवाल यह उठता है कि—
अगर अनुमति नहीं थी, तो यह सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा कैसे हुआ?
अगर जानकारी नहीं थी, तो क्या कॉलेज प्रशासन इतना लाचार और पंगु हो चुका है कि बिना बताए टेंट लग जाए, भीड़ जमा हो जाए और प्राचार्य को खबर तक न हो?

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इस लापरवाही ने न केवल परीक्षा की शुचिता को प्रभावित किया है, बल्कि एक जिम्मेदार सरकारी पद की गरिमा पर भी सवालिया निशान लगा दिया है।
अब तक इस मामले में न तो पुलिस को सूचना दी गई है और न ही किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई है।