स्मृतियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा की रीढ़: प्रो. भगवत् शरण शुक्ल।

स्मृतियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा की रीढ़: प्रो. भगवत् शरण शुक्ल।
ख़बर शेयर करें -

स्मृतियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा की रीढ़: प्रो. भगवत् शरण शुक्ल।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर। “स्मृतियाँ भारतीय ज्ञान परंपरा की रीढ़ हैं,” यह विचार काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के पूर्व व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रोफेसर भगवत् शरण शुक्ल ने गुरु दिवस व्याख्यानमाला में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

पीएनजी राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रामनगर के कैरियर काउंसलिंग प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित चतुर्थ श्रृंखला के नौवें व्याख्यान का आयोजन संस्कृत विभाग द्वारा किया गया, जिसका विषय था “भारतीय संस्कृत ज्ञान परंपरा (स्मृतियों के विशेष परिप्रेक्ष्य में)”

संस्कृत: ज्ञान-विज्ञान की अमूल्य निधि

प्रो. भगवत् शरण शुक्ल ने संस्कृत को विश्व की समस्त भाषाओं की जननी बताते हुए कहा कि यह भाषा विविध ज्ञान-विज्ञान, नैतिक मूल्यों और संस्कारों का अद्वितीय स्रोत है। उन्होंने स्मृतियों के वैज्ञानिक तथ्यों और सामाजिक विज्ञान के योगदान को रेखांकित किया, जो मनुष्य को श्रेष्ठ मानव बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं।

यह भी पढ़ें 👉  वन दरोगा को रिश्वत लेने के मामले में तीन साल और 25 हजार रुपये के जुर्माना की सजा।

स्मृतियाँ और समाज का आदर्श स्वरूप

उन्होंने कहा कि मनुस्मृति एवं याज्ञवल्क्य स्मृति जैसी ग्रंथों का उद्भव सामाजिक आचार, विचार और व्यवहार को व्यवस्थित करने के लिए हुआ है। इनमें वैज्ञानिक सिद्धांतों, उत्तम कर्मों और संस्कारों का विस्तृत प्रतिपादन किया गया है। व्याख्यान के अंत में उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया

संस्कृत: केवल भाषा नहीं, संपूर्ण जीवन-दर्शन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के परीक्षा नियंत्रक प्रो. पवन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत केवल भाषा तक सीमित नहीं है, बल्कि वेद, स्मृति और संपूर्ण भारतीय ज्ञान परंपरा को आत्मसात करने वाली जीवन-पद्धति है।

यह भी पढ़ें 👉  सीपीयू हल्द्वानी का विशेष अभियान: नो पार्किंग में वाहन खड़ा करने वालों पर कार्रवाई।

संस्कृत ज्ञान परंपरा की व्यापकता

कार्यक्रम निदेशक एवं महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. एम.सी. पांडे ने कहा कि स्मृतियाँ केवल चातुर्वर्ण्य व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे लोकोपकारी वैज्ञानिक पहलुओं को भी उजागर करती हैं

कार्यक्रम का संचालन आयोजक सचिव एवं संस्कृत विभाग प्रभारी डॉ. मूलचंद्र शुक्ल ने किया। उन्होंने विषयवस्तु की रूपरेखा प्रस्तुत की और अंत में सभी अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त किया।

सफल आयोजन में इनका विशेष योगदान

कार्यक्रम के प्रबंधन में कैरियर काउंसलिंग संयोजक डॉ. अनुराग श्रीवास्तव, सह-संयोजक डॉ. लोतिका अमित, डॉ. रागिनी गुप्ता एवं प्रकाश सिंह बिष्ट का विशेष योगदान रहा।

यह भी पढ़ें 👉  मुख्यमंत्री ने ‘टीवी 9 शिखर सम्मेलन 2025’ में किया प्रतिभाग, विकास व नीतियों पर रखे विचार।

इस अवसर पर महाविद्यालय और अन्य संस्थानों के गणमान्य व्यक्तियों एवं शिक्षाविदों ने भाग लिया, जिनमें प्रो. गिरीश पंत, चीफ प्रॉक्टर प्रो. एस.एस. मौर्य, प्रो. पुनीता कुशवाहा, डॉ. अशोक मिश्र, डॉ. सुधा, डॉ. गणेश्वरनाथ झा, डॉ. डी.एन. जोशी, डॉ. नीलेश उपाध्याय, डॉ. वेदव्रत, डॉ. नीरज जोशी, डॉ. राजकुमार, डॉ. शारदा पाठक, डॉ. सुमन कुमार, डॉ. मुरलीधर पालीवाल, डॉ. विपिन झा, डॉ. विष्णुकांत त्रिपाठी, डॉ. मुरलीधर कापड़ी, अशोक तिवारी, डॉ. बलवीर चंद्र, डॉ. दीप्ति, राधे कृष्ण शुक्ल एवं सोनू कुमार आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।