अब हर सूचना पर बनेगा रिपोर्ट कार्ड, कुमाऊँ में जवाबदेह पुलिसिंग की शुरुआत।
उधम सिंह राठौर – प्रधान सम्पादक
नैनीताल।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पुलिस व्यवस्था अब केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि जन-सेवा, संवेदनशीलता और जवाबदेही का मजबूत मॉडल बनती जा रही है। कुमाऊँ परिक्षेत्र में यह बदलाव साफ़ तौर पर दिखाई दे रहा है, जहाँ डायल 112 जैसी आपातकालीन सेवा को महज़ “रिस्पॉन्स सिस्टम” नहीं, बल्कि “पीड़ित-संतुष्टि आधारित पुलिसिंग” के रूप में विकसित किया गया है।
मुख्यमंत्री धामी की स्पष्ट सोच है कि शासन और प्रशासन की सफलता योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि ज़मीन पर उनके प्रभाव और जनता के भरोसे से तय होती है। इसी विज़न को कुमाऊँ परिक्षेत्र में अमल में ला रही हैं पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल, जिनके नेतृत्व में तेज़ कार्रवाई के साथ-साथ संवेदनशील और परिणाम-आधारित पुलिसिंग को प्राथमिकता दी जा रही है।
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के निर्देश स्पष्ट हैं— “तेज़ रिस्पॉन्स पर्याप्त नहीं, पीड़ित की संतुष्टि ही पुलिस कार्यवाही की असली कसौटी है।” इसी नीति के तहत अब कुमाऊँ में हर सूचना पर पुलिस की कार्रवाई का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाएगा। यदि किसी सूचना पर लापरवाही या टालमटोल सामने आती है, तो संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जाएगी।
डायल 112: अब आपातकालीन नंबर नहीं, जनता का भरोसा
कुमाऊँ परिक्षेत्र में डायल 112 सेवा को पूरी तरह जवाबदेह बनाया गया है। गंभीर मामलों में वरिष्ठ स्तर पर निगरानी, कार्रवाई के बाद सीधे पीड़ित से फीडबैक और लापरवाही पाए जाने पर तत्काल एक्शन की व्यवस्था लागू की गई है। महिला, बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और संवेदनशील मामलों में शून्य सहनशीलता की नीति अपनाई गई है।
आँकड़े जो बदलाव की गवाही देते हैं
सितंबर से 31 दिसंबर 2025 तक कुमाऊँ में कुल 3432 गंभीर कॉल दर्ज की गईं। इनमें महिला अपराध से जुड़े 3016, तस्करी 216, वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित 87, स्नैचिंग 76, हत्या 10 और लूट के 13 मामले शामिल हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि कुमाऊँ पुलिस केवल कॉल दर्ज नहीं कर रही, बल्कि हर कॉल के पीछे खड़े व्यक्ति की सुरक्षा और संतुष्टि को प्राथमिकता दे रही है।
फील्ड से भरोसे की मिसालें
हरियाणा से घूमने आई महिला के साथ मारपीट के मामले में त्वरित कार्रवाई, चम्पावत में सड़क दुर्घटना के घायलों का तत्काल रेस्क्यू, नशे की गिरफ्त में फंसे युवक को नई ज़िंदगी की राह दिखाना, 11 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म प्रयास में आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी—ये सभी उदाहरण कुमाऊँ पुलिस की बदली कार्यशैली को दर्शाते हैं।
सख़्ती और संवेदनशीलता का संतुलन
आईजी रिद्धिम अग्रवाल के नेतृत्व में कुमाऊँ पुलिस ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध पर सख़्ती और पीड़ित के प्रति संवेदना—दोनों साथ-साथ चलेंगी। भय की जगह भरोसे पर आधारित यह पुलिसिंग मॉडल अब कुमाऊँ की पहचान बनता जा रहा है।






