**“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने रचा नया कीर्तिमान।

**“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने रचा नया कीर्तिमान।
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**“जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान ने रचा नया कीर्तिमान।

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी के कुशल, संवेदनशील एवं परिणामोन्मुख नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” कार्यक्रम प्रदेश में सुशासन, त्वरित सेवा-प्रदान और जनसमस्याओं के प्रभावी समाधान का सशक्त मॉडल बनकर उभरा है। यह अभियान सरकार और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित कर शासन को वास्तविक अर्थों में जन-केंद्रित बना रहा है।

20 जनवरी 2026 तक राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के अंतर्गत कुल 408 जनसेवा शिविरों का आयोजन किया जा चुका है। केवल आज के दिन 13 नए शिविर आयोजित कर सरकार ने अपनी सक्रियता और प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। इन शिविरों में अब तक 3,30,461 नागरिकों ने सहभागिता की, जिनमें से आज 7,876 नागरिकों की सीधी भागीदारी रही। यह आंकड़े मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल पर जनता के बढ़ते विश्वास को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

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अभियान के तहत अब तक 33,529 शिकायत एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 22,675 मामलों का सफल निस्तारण किया जा चुका है। केवल आज के दिन ही 783 नए प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 502 मामलों का समाधान मौके पर अथवा संबंधित विभागों के माध्यम से सुनिश्चित किया गया। यह त्वरित निस्तारण राज्य सरकार की प्रशासनिक दक्षता और जवाबदेही का प्रमाण है।

इसके अतिरिक्त, विभिन्न प्रमाण-पत्रों एवं शासकीय सेवाओं के लिए अब तक 43,975 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनमें आज 659 नए आवेदन शामिल हैं। राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 1,79,169 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा चुका है, जिनमें आज 3,911 नए लाभार्थी जुड़े। यह उपलब्धि दर्शाती है कि सरकारी योजनाएं अब कागजों तक सीमित न रहकर धरातल पर प्रभावी रूप से लागू हो रही हैं।

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जनपदवार आंकड़े बताते हैं कि देहरादून, हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, नैनीताल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़ सहित पर्वतीय एवं मैदानी सभी जिलों में इस अभियान को समान उत्साह और सहभागिता मिली है। शिविरों में उमड़ी भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह पहल जनता की वास्तविक जरूरतों से सीधे जुड़ी हुई है।

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनता के प्रति सरकार की जवाबदेही और संवेदनशीलता का प्रतीक है। जब सरकार स्वयं जनता के पास जाकर समस्याएं सुनती है और उनका समाधान करती है, तो शासन के प्रति विश्वास स्वतः सुदृढ़ होता है।

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उत्तराखंड सरकार का यह अभियान प्रदेश में सुशासन की नई कार्यसंस्कृति को स्थापित कर रहा है, जहां संवाद, समाधान और सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह कार्यक्रम भविष्य में और अधिक व्यापक रूप में जारी रहेगा तथा उत्तराखंड को जनकल्याण और सुशासन का आदर्श राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।