जेल नहीं, नई जिंदगी की पाठशाला! हल्द्वानी जेल में बदल रही महिला बंदियों की तकदीर।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
जेल अब सिर्फ सजा काटने की जगह नहीं, बल्कि नई जिंदगी की शुरुआत का केंद्र भी बन रही है। हल्द्वानी उप जिला कारागार में महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई-कढ़ाई, बेकरी और ब्यूटीशियन जैसे हुनर सिखाए जा रहे हैं। इन व्यवस्थाओं का जायजा लेने पहुंचीं उत्तराखंड राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने जेल में चल रहे सुधारात्मक कार्यों की सराहना करते हुए महिला बंदियों के पुनर्वास और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया।
दो दिवसीय हल्द्वानी दौरे पर पहुंचीं महिला आयोग की अध्यक्ष कुसुम कंडवाल ने उप जिला कारागार का निरीक्षण कर महिला बंदियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने उनकी समस्याओं, खान-पान, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य सुविधाओं की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान जेल प्रशासन की ओर से महिला बंदियों के लिए किए जा रहे सुधारात्मक प्रयासों पर संतोष जताते हुए उन्होंने कहा कि जेलों को सुधार गृह की भावना के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए।
हल्द्वानी जेल में महिला बंदियों को सिलाई, बुनाई और कढ़ाई का प्रशिक्षण आधुनिक मशीनों के जरिए दिया जा रहा है। जेल परिसर में संचालित बेकरी यूनिट में तैयार उत्पाद बाजार में बेचे जा रहे हैं, जिससे महिला बंदियों को रोजगार का अनुभव और आमदनी दोनों मिल रही है। इसके अलावा हाल ही में आयोजित ब्यूटीशियन कोर्स ने भी महिला बंदियों को आत्मनिर्भर बनने की नई दिशा दी है।
जेल प्रशासन ने महिला बंदियों की शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्हें उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि रिहाई के बाद वे सम्मानजनक जीवन जी सकें। महिला आयोग की अध्यक्ष ने चिकित्सा सुविधाओं का भी निरीक्षण किया और उन्हें संतोषजनक बताया। उन्होंने कहा कि कौशल विकास और शिक्षा ही महिला बंदियों के सफल पुनर्वास का सबसे मजबूत माध्यम है।




