उधम सिंह राठौर – प्रधान सम्पादक
मानव वन्यजीव संघर्ष विषय पर चर्चा व स्थानीय समुदायों की भागीदारी तथा संरक्षण गतिविधियों से ग्रामीण लाभांश पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। वन्यजीवों के बदलते व्यवहार के चलते ग्रामीण इलाकों में जागरुकता तथा उपयुक्त प्रचार प्रसार में सहभागिता, संघर्ष की स्थिति में जन चेतना व मानव व्यवहार पर मंथन हुआ। कॉर्बेट पार्क के निर्देशक डॉ० धीरज पांडे ने पार्क प्रशासन द्वारा किए गए प्रयासों की चर्चा की। डॉ० पांडे ने कहा कि संरक्षण हेतु सामुदायिक भागीदारी आवश्यक है, बिना जन सहभागिता के भारत में वन एवम वन्यजीव संरक्षण संभव नहीं है।
पार्क स्तर पर नेचर गाइड, जीप स्वामी व ड्राइवर को तीन चरणों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस कार्यशाला में उपस्थित राज्य वन्यजीव बोर्ड के सदस्य संजय सोंधी ने बताया कि इस दिशा में बोर्ड द्वारा कम्यूनिटी पार्टिसिपेशन को प्रमुखता से ध्यान दिया जा रहा है साथ ही बाघ मित्र, मीडिया कर्मियों का सहयोग लिया जाएगा। नेचर साइंस इनिशिएटिव के सस्थापक डॉo सौम्या प्रसाद ने अनिंत्रित पर्यटन/अनैतिक गतिविधियो पर चिंता व्यक्त की। ईको टूरिज्म “कैंप हॉर्नबिल” के ग्रामीण सयोजक नवीन उपाध्याय ने बताया कि सामुदायिक सहभागिता से सरंक्षण एवम रोजगार दोनों संभव है।
ग्रामीण युवाओं को संरक्षण गतिविधि से जोड़ने के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। श्री उपाध्याय ने कहा कि पर्यटन में स्थानीय ग्रामीणों को बढ़ चढ़कर भाग लेना चाहिए, जिससे स्थानीय लोग पर्यावरण के प्रति जागरूक होंगे और संरक्षण को बढ़ावा देंगे। बैठक में उपस्थित “विप्रो अर्थीअन” के 30 नेचर एजुकेटर ने भाग लिया।

























