ग्रीष्मकाल में पशुओं का कार्य समय दोपहर 12:00 से 3:00 बजे तक प्रतिबंधित रहेगा, ये है नियम.. 

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ग्रीष्मकाल में पशुओं का कार्य समय दोपहर 12:00 से 3:00 बजे तक प्रतिबंधित। ये है नियम..

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

पशुओं के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम-1960 की धारा 3 के अनुसार किसी पशुपालक का कर्तव्य है कि वह पशु के कल्याण के लिए उपाय करे, जिससे उसे अनावश्यक पीड़ा और यातना न झेलनी पड़े। इसी प्रकार परिवहन और कृषि पशुओं पर क्रूरता निवारण नियम-1965 के नियम 6 का उपनियम 3 के अनुसार जिन क्षेत्रों में तापमान 37 डिग्री से अधिक रहता है, वहां दोपहर 12 से 3 बजे के बीच पशु को उपयोग में लेना नियम के उल्लंघन की श्रेणी में आता है।

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इसी अधिनियम की पालना में यह आदेश जारी किए गए हैं। साथ ही, पशु मालिक को पशुओं के लिए भोजन, पानी और छाया की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय जीव जंतु कल्याण बोर्ड के के आधार पे एनिमल एक्टिविस्ट प्रथम बिष्ट ने उत्तराखंड राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड से यह निर्देश जारी कराए हैं।

 

 

जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने अपील की

 

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रूद्रपुर व्यापारिक शहर है। यहां अन्य उद्योगों की बहुतायत है। हालांकि, समय के साथ उद्योगों में तकनीक का उपयोग लिया जा रहा हैं, लेकिन व्यापार जगत में आज भी कई ठिकाने ऐसे हैं, जहां घोड़ा, गधा, खच्चर, बैल और भैंस गाड़ी का उपयोग कर निर्धन परिवार अपनी जीविकोपार्जन करते हैं। शुष्क दिनों में यहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है। जैसे-जैसे पारा चढ़ता है, वैसे-वैसे बोझ ढोने वाले पशुओं घोड़ा, गधा, खच्चर, बैल और भैंस को अनावश्यक पीड़ा, हीट स्ट्रोक और अकाल मृत्यु होने की संभावना बढ़ गई है। इसे देखते हुए जीव जंतु कल्याण बोर्ड ने अपील की है कि गर्मी में लोग घर के आस-पास पशुओं के लिए रोज स्वच्छ जल की व्यवस्था कर बेसहारा और बोझा ढोने वाले पशुओं को हीट स्ट्रोक तथा अकाल मृत्यु से बचाने के कार्य में सहयोग दें।

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आदेशों में ऐसा नहीं करने पर पशु मालिक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही गई है। नियमों के तहत पशु को यातना देने पर तीन महीने की जेल और जुर्माना लगाने का प्रावधान है।


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