धूमधाम से मनाया गया 73वा गणतन्त्र दिवस।

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रोशनी पाण्डेय सह- सम्पादक

रूद्रपुर – देश का 73 वां गणतन्त्र दिवस जनपदभर में धूमधाम व हर्शाेल्लास से मनाया गया। जिला मुख्यालय कलक्टेªट एवं पुलिस लाईन में जिलाधिकारी श्री युगल किशोर पन्त ने ध्वजारेाहण किया तथा राष्ट्रगान के उपरान्त उपस्थित लोगों को संविधान की शपथ दिलाई। पुलिस लाईन में जिलाधिकारी युगल किशोर पन्त ने कलेक्टैªट परिसर व पुलिस लाईन में मुख्य अतिथि के रूप मंे राश्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और पुलिस परेड की सलामी ली। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने जनपदवासियों को 73वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी। कलेक्ट्रेट परिसर में जिलाधिकारी ने स्वतन्त्रता सेनानी के उत्तराधिकारियों को मालाओं व शाॅल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

 

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने कहा कि आज ही के दिन सन् 1950 में हमारे देश में सविधान लागू हुआ था। उन्होंने कहा कि कोरोना का संक्रमण भी चरम पर है और गणतन्त्र में प्रतिभाग करने का अवसर भी सबका मिल रहा है, आगामी 14 फरवरी को मतदान दिवस भी है। उन्होने सभी जनपदवासियों से अनुरोध किया कि अधिक से अधिक संख्या में अपने मतदान केन्द्र पर जाकर अपने मत का प्रयोग करें, और इस बार के मतदान को स्वतंत्र, निश्पक्ष एवं सुरक्षित बनायें। उन्होने कहा कि आप सबको विदित ही है कि गणतन्त्र लोकतन्त्र का एक अग्रणी स्वरूप है और इसकी आधारषिला है निर्वाचन, हमारा सौभग्य है कि आने वाले दिनों में 14 फरवरी को मतदान दिवस है। हम सबके लिए यह एक अवसर है कि हम सब गणतन्त्र को और मजबूत करें, और अधिक से अधिक संख्या में मतदान करें। उन्होने कहा कि इस बार का मतदान निश्पक्ष और स्वतन्त्र ही नही हमें कोरोना के संक्रमण को देखते हुए सुरक्षित मतदान भी कराना है। हम जानते है कि जो वीर सपूत थे, जिन्होने देष की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया है उन लोगों के लिए सच्ची श्रद्धांजली यही होगी कि जब हम लोग चाहे किसी भी वर्ग के हो किसी भी जाति किसी भी व्यवसाय से हो हमे अपने कत्र्वयों का निर्वाहन पूरी ईमानदारी, निश्ठा व कुषलता से करना होगा। यही हमारे देष के लिए सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण योगदान होगा।

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सन् 1950 में आज ही के दिन हमारे देष में संविधान लागू हुआ था और भारत विश्व के सबसे बड़े गणतंत्र के रूप में स्थापित हुआ था। आज का दिन वह दिन है जब हम उन विरांगनाओं, महानायकों को याद करते है जिन्होने स्वाधीनता के सपने को साकार करने के लिए अतुलनीय साहस, बलिदान का परिचय दिया। और समस्त देषवासियों को स्वाधीनता के संघर्श के लिए प्रत्यषील कराया। आप सभी को विदित है कि सविंधान का निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था और उस संविधान सभा में उस वक्त की महान विभूतियां मौजूद थी। उन्होने लगभग 3 वर्श की अथक परिश्रम के बाद सविधान को अंतिम रूप दिया। संविधान को अंतिम रूप दिये जाने में डाॅ0 बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर का बहुमूल्य योगदान था। उन्होने ही संविधान के प्रारूप को अन्तिम रूप दिया था। संविधान की प्रस्तावना में जो आधारभूत सिद्धान्त है लोकतन्त्र, न्याय, स्वतन्त्रता, समानता और बन्धुत्वता इन्ही सिद्धान्तों के आधार पर हमारा संविधान गठित हुआ है। हमारे संविधान में न सिर्फ राजकाज करने के तरीके दिये गये है बल्कि समस्त नागरिंकों को उनके मूल अधिकार और मूल कत्र्वय की व्याख्या भी की गई है। उन्होने कहा कि मूल अधिकार व मूल कत्र्वय एक ही सिक्के के दो पहलू है। उन्होने कहा कि आज हमारा राज्य या देष ही नही बल्कि पूरी विष्व ही कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है,
मानव समुदाय को एक दूसरे की सहायता की इतनी जरूरत कभी नहीं पड़ी थी जितनी की आज है, अब 2 साल से भी अधिक समय बीत गया है लेकिन मानवता का कोरोना वायरस के विरुद्ध संघर्ष अभी भी जारी है। इस महामारी में हजारों लोगों को जान से हाथ धोना पड़ा है, पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था पर आघात हुआ है, पूरे विश्व समुदाय को पूर्णता का सामना करना पड़ा है।

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अतः हमें सतर्क रहना चाहिए और अपने बचाव में तनिक भी ढील नहीं देनी चाहिए, हमने अब तक जो सावधानियां बरती हैं, मास्क पहनना और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखना कोविड अनुरूप व्यवहार के अनिवार्य अंग रहे हैं कोविड माहमारी के खिलाफ लड़ाई में वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों द्वारा बताई गई सावधानियों का पालन करना आज हर देशवासी का राष्ट्र धर्म बन गया है। यह राष्ट्रधर्म हमें तब तक निभाना ही है जब तक यह संकट दूर नहीं हो जाता। संकट की घड़ी में हमने यह देखा है कि कैसे हम सभी देशवासी एक परिवार की तरह आपस में जुड़े हुए हैं सोशल डिस्टेंसिंग के कठिन दौर में हम सब ने एक दूसरे के साथ निकटता का अनुभव किया है हमने महसूस किया है कि हम एक दूसरे पर कितना निर्भर करते हैं कठिन परिस्थितियों में लंबे समय तक काम करके यहां तक कि मरीजों की देखभाल के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर भी डॉक्टरों नर्सों और पैरामेडिक्स ने मानवता की सेवा की है बहुत से लोगों ने देश में गतिविधियों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए यह सुनिश्चित किया है कि अनिवार्य सुविधाएं उपलब्ध रहें तथा सप्लाई चैन में रुकावट न पैदा हो।

उन्होेने नागरिको से उन्नत राश्ट्र के निर्माण हेतु आपसी तालमेल के साथ पूरी निश्ठा व ईमानदारी से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होने कहा प्रत्येक नागरिक को अपने अधिकारो के साथ ही कर्तव्यो के प्रति संवेदनषील होकर कार्य करना होगा ताकि राश्ट्र उन्नति की ओर तेजी से अग्रसर हो सके। जिलाधिकारी ने कहा हमारे देष के संविधान को बनाते समय हर बात का ध्यान रखा गया है। उन्होने कहा 60 देषों के संविधान का अध्ययन करते हुए भारत का संविधान बनाया गया है। उन्होने कहा हम सब सौभाग्यषाली है हम आजाद देष मे पैदा हुए है। उन्होने कहा हम सभी को केवल आज का न सोचते हुए देष के भविश्य को सोचते हुए कार्य करने होंगे। उन्होंने कहा स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों ने देश की आजादी के लिये अपनी जान गंवाई तथा देशवासियों के सामने अपने जीवन मूल्य रखे है एवं हमारा गणतंत्र इन्ही मूल्यों पर आधारित है इनकी रक्षा करना हमारा प्रथम कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि समय, व्यक्ति की गरिमा, विश्व बन्धुत्व, सर्व धर्म समभाव, धर्म निरपेक्षता गणतंत्र का मूलमंत्र है। अपने गणतंत्र को बरकरार रखने के लिये हमें अपने कर्तव्य एवं दायित्वों के निर्वहन करने के साथ आने वाली पीढी के लिए भी सुनहरे भविष्य का निर्माण करना भी हमारा कर्वव्य है।

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इस अवसर पर परेड के साथ-साथ विभिन्न विकास विभागो द्वारा झांकियो का प्रर्दशन किया गया। स्वीप के द्वारा प्रस्तुत की गई झांकी को प्रथम, आपद प्रबन्धन विभाग को द्वितीय एवं गन्ना विकास विभाग को तृतीय पुरूस्कार दिया गया। इस अवसर पर वरिश्ठ पुलिस अधीक्षक बरिन्दरजीत सिंह ने जनपदवासिंयो को गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए कहा हमे जो दायित्व सौंपे गये है उनका निर्वहन ईमानदारी से करते हुए प्रदेष व जनपद को हर क्षेत्र मे आगे ले जाए। उन्होने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी अशीष भटगांई, अपर जिलाधिकारी डाॅ0 ललित नारायण मिश्र, उपजिलाधिकारी प्रत्यूष सिंह, जिला विकास अधिकारी डाॅ0 महेश कुमार, तहसीलदार नितेश डागर व अन्य लोग उपस्थित थे।

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