गर्भवती महिला को अस्पताल से भागने के मामले की जांच शुरू।

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उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

रुद्रपुर –  हमारे समाज में चिकित्सकों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। वही इन चिकित्सकों के सहयोगी भी फ़रिश्ते की भूमिका निभाते हैं। लेकिन उस समय इन्हें क्या कहा जाए जब एक गर्भवती महिला को यह सरकारी मुलाजिम अस्पताल से उसे डांट फटकार वहां से बाहर का रास्ता दिखा दें। जी हां हम बात कर रहे रुद्रपुर के जिला अस्पताल पंडित जवाहरलाल नेहरू जिला चिकित्सालय की जहां देर रात अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे कुछ स्वास्थ्य कर्मचारियों ने दर्द से कराह रही एक गर्भवती महिला को डाट फटकार वहां से भगा दिया। जिला अस्पताल में आधी रात को एक गर्भवती महिला को दुत्कार कर भगाने के इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा डीएस पचपाल ने शनिवार को घटना वाली रात के दौरान अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की सूची तलब की है। इसके अलावा उस रात अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।

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सोमवार को इन स्वास्थ्य कर्मियों से सहित अन्य स्टाफ से पूछताछ शुरू की जाएगी। नगर की ट्रांजिट कैंप वार्ड नंबर 9 शिवनगर निवासी महेंद्र पाल उस रात अपनी धर्म पत्नी अमरवती को लेकर करीब डेढ़ बजे जिला अस्पताल पहुंचा था। बाकौल महेंद्र जिला अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने अमरवती की हालत गंभीर बताते हुए उसे भर्ती करने से साफ इंकार कर दिया। करीब दो घंटे के कड़ी मिन्नतों और हाथ पांव जोड़ने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला तो परिजन उसे एक प्राइवेट अस्पताल ले गए। शुक्रवार की तड़के सुबह अमरवती ने एक पुत्र को जन्म दिया। हैवान बनें इन स्वास्थ्य कर्मियों ने दर्द से कराह रही गर्भवती महिला को नजरंदाज कर दिया, और यह लोग हैवान बन बैठें।

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जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ देवेंद्र सिंह पचपाल ने बताया कि घटना वाली रात में अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों की सूची मांगी गई है। वही स्टाफ के हर व्यक्ति से पूछताछ की जाएगी। वही महिला के पति को भी बुलाया जाएगा और स्टाफ की पहचान कराईं जाएगी। वही दोषी स्वास्थ्य कर्मियों के कड़ी कार्रवाई की जाएगी।‌ सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को पतीला लगा रहे इन स्वास्थ्य कर्मियों और स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारियों के खिलाफ सरकार को भी सख्त कदम उठाने चाहिए।

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जीवन देने वाले जिला अस्पताल में आए दिन इस तरह की घटनाएं आम हो गई है। वही हमारे एक निजी सूत्र ने बताया कि जिला अस्पताल में भ्रष्टाचार चरम पर है। सरकारी योजनाओं के नाम पर आने वाले धन की बंदरबांट की जा रही है। अगर सरकार किसी ईमानदार आला अधिकारी से जिला अस्पताल की गहनता से जांच कराएं तों बहुत से सनसनीखेज खुलासे हो सकते हैं।

 

 

 

 

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