गुमनामी के दौर से गुजर रहे उत्तराखंड के ऐसे युवा कलमकार को मंच और सहयोग की दरकार है।

ख़बर शेयर करें -

रोशनी पाण्डेय – सह सम्पादक

पुष्कर मावड़ी : आंचलिक पीड़ा को समेटता लेखक

पुष्कर मावड़ी उत्तराखंड की धरती से उभरता हुआ कलमकार है । पुष्कर की लिखी हुई रचना से उनके लेखन की गहराई का आभास होता है। अपने बारे में बताते हुए पुष्कर मावड़ी कहते हैं कि, मैंने कुछ समय पूर्व कविताएं लिखते वक्त एक किरदार गढ़ा था “जुन्याली” नाम का। मैं उस पर चार कविताएं लिखने वाला था जिसमें से केवल एक ही लिख पाया। बाकी तीन कविताएं जुन्याली के मेला देखने जाने पर, गांव के विवाह में शामिल होने पर, और जागर पर लिखी जानी थी। जब यह कविताएं किसी वजह से पूरी नहीं हो पाईं तो मैंने इस किरदार को कहानी के माध्यम से रचने की कोशिश की। जुन्याली पहाड़ के दर्द को बयान करती है। पलायन, स्वास्थ्य सुविधाओं का आभाव, कृषि संबंधित समस्याएं और भी कई समस्याएं हैं जिससे पहाड़ का निवासी हर दिन जूझता है। वही दर्द यहां बयान करने की कोशिश की है।

यह भी पढ़ें 👉  कैलाश मानसरोवर यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार पूरी तरह तैयार, श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा से लेकर हेलीकॉप्टर तक के इंतजाम।

 

वे आगे कहते हैं कि, पुष्कर समाज को देखता है और समझने की कोशिश करता है कि क्या हो रहा है और क्यों हो रहा है। साथ ही कलम के माध्यम से समाधान खोजने की भी कोशिश करता है। पिछले दस-पंद्रह सालों से तो कविताएं लिख रहा हूँ और अपने मित्र केदारनाद के लिए कुछ गीत भी लिखे हैं। सीसीआरटी नई दिल्ली से जुड़े गौरीशंकर काण्डपाल कहते हैं कि, पहाड़ के पलायन और लॉकडाउन की पीड़ा को जिस संजीदगी के साथ पुष्कर ने अपनी पुस्तक जुन्याली में बांधने का प्रयास किया है, वह सराहनीय और निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण कृत्य है।

यह भी पढ़ें 👉  🚨*KVM स्कूल में लगी आग, समय पर पहुंची फायर ब्रिगेड, सुरक्षित बचीं आसपास की संपत्तियां तीन फायर टेंडरों ने आग पर पाया काबू* 👍*जनहानि शून्य, राहत एवं बचाव कार्य सफल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी बोले- फायर विभाग की विस्तृत रिपोर्ट के बाद विधिक कार्रवाई की जाएगी*

ख़बर शेयर करें -

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *