टेंडर निरस्त कर चहेतों को दिए ठेके? रामनगर पालिका पर करोड़ों की बंदरबांट का आरोप।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर नगर पालिका में करोड़ों रुपये के कथित घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। नगर पालिका के 61 ठेकों में वित्तीय अनियमितता और बंदरबांट के आरोप लगे हैं। मामले की शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता अरविंद कुमार द्वारा देहरादून में वित्त सचिव को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर पालिका ने पहले 61 ठेकों के लिए निविदाएं आमंत्रित कीं। लेकिन कम दर आने के बावजूद इन निविदाओं को निरस्त कर दिया गया। इसके बाद दोबारा अखबारों में टेंडर प्रकाशित किए गए और कथित तौर पर अपने चहेते ठेकेदारों को काम दे दिया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया।
शिकायत में दूसरा मामला पशुपालन पंजीकरण से जुड़ा बताया गया है। आरोप है कि एक ठेकेदार 75 लाख रुपये में ठेका लेने को तैयार था, लेकिन नगर पालिका ने वही ठेका 55 लाख रुपये में उसी ठेकेदार को दे दिया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हुआ।
तीसरा मामला जी-20 सम्मेलन के दौरान रामनगर डिग्री कॉलेज के पास हुए विकास कार्यों से जुड़ा बताया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार इन कार्यों में भी बड़े स्तर पर अनियमितता और करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका है।
शिकायत के आधार पर नैनीताल प्रशासन हरकत में आया और एडीएम शैलेंद्र नेगी जांच के लिए रामनगर पहुंचे। उन्होंने संबंधित अभिलेखों और दस्तावेजों की जांच की।
एडीएम शैलेंद्र नेगी ने बताया कि शिकायतकर्ता अरविंद कुमार की शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल इस मामले ने रामनगर नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी।


















