राज्य आंदोलनकारियों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, समस्याओं के समाधान की उठाई मांग।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
राज्य आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल हल्द्वानी स्थित जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां उन्होंने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने राज्य आंदोलनकारियों से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग उठाई।
प्रतिनिधिमंडल में प्रभात ध्यानी, भुवन जोशी, पुष्कर दुर्गापाल, शेर सिंह लटवाल, बृजमोहन सिजवाली, पान सिंह नेगी और रईस अहमद शामिल रहे।
ज्ञापन में कहा गया कि उत्तराखंड राज्य के निर्माण के लिए हुए आंदोलन में 42 से अधिक आंदोलनकारियों ने शहादत दी, जबकि खटीमा, मसूरी और मुजफ्फरनगर जैसी घटनाओं में महिलाओं के साथ अत्याचार और सैकड़ों लोगों को जेल जाना पड़ा। लंबे संघर्ष और दमन के बाद 9 नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य अस्तित्व में आया।
आंदोलनकारियों ने कहा कि राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर सरकार रजत जयंती समारोह मना रही है, लेकिन राज्य निर्माण की मूल अवधारणाओं—जैसे स्थायी राजधानी गैरसैंण, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार, भू-कानून और मूल निवास जैसे मुद्दे आज भी अधूरे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारी आज विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिन पर सरकार को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।
मुख्य मांगें:
- राज्य आंदोलनकारियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के समान सभी सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए घोषित 10% शैक्षिक आरक्षण का लाभ तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए।
- चिह्निनीकरण से वंचित आंदोलनकारियों के लंबित आवेदनों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आंदोलनकारियों ने जिलाधिकारी से इन मांगों पर संज्ञान लेकर शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
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