कानून व्यवस्था पर संयुक्त संघर्ष समिति का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। संयुक्त संघर्ष समिति, रामनगर ने राज्य में बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को उपजिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। समिति के प्रतिनिधिमंडल ने हाल के दिनों में सामने आए सामूहिक दुष्कर्म, पुलिस प्रताड़ना और सांप्रदायिक हिंसा के मामलों पर चिंता जताते हुए सरकार से निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की।
प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी, मो. आसिफ, इंकलाबी मजदूर केंद्र के महासचिव रोहित रुहेला, महिला एकता मंच की संयोजिका ललिता रावत, समाजवादी लोक मंच के महेश जोशी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अतुल कुमार सहित अन्य लोग शामिल रहे।
ज्ञापन में चम्पावत में नाबालिग युवती से सामूहिक दुष्कर्म के संदिग्ध मामले, पौड़ी के सतपुली एवं नैनीताल के खैरना में पुलिस प्रताड़ना से परेशान युवकों की आत्महत्या तथा टिहरी जिले के लंबगांव में सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं का उल्लेख किया गया। समिति ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही है और आम जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है।
चम्पावत मामले का जिक्र करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इस प्रकरण में भाजपा नेताओं के नाम सामने आने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। समिति ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई।
सतपुली और खैरना की घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा गया कि पुलिस प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर युवकों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाएं बेहद गंभीर हैं। ज्ञापन में आरोपित पुलिस कर्मियों को तत्काल निलंबित कर निष्पक्ष जांच कराने तथा पीड़ित परिवारों को मुआवजा और सरकारी नौकरी देने की मांग की गई।
टिहरी जिले के लंबगांव में हुई सांप्रदायिक आगजनी की घटना का उल्लेख करते हुए समिति ने कहा कि वीडियो साक्ष्य सामने आने के बावजूद आरोपियों पर कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है। ज्ञापन में पीड़िता को सुरक्षा और उचित मुआवजा उपलब्ध कराने की भी मांग की गई।
समिति ने सरकार से राज्य में कानून व्यवस्था को मजबूत करने, महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।


