अवैध खनन या विभागीय ज्यादती? रामनगर में आमने-सामने कारोबारी और वन विभाग।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। रामनगर में खनन कारोबारियों और तराई पश्चिमी वन प्रभाग के बीच विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। शनिवार को बड़ी संख्या में खनन कारोबारी तराई पश्चिमी वन प्रभाग कार्यालय पहुंचे, जहां उन्होंने डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। गुस्साए कारोबारियों ने डीएफओ का पुतला फूंकते हुए वन विभाग पर मनमानी, उत्पीड़न और वैध वाहनों को जबरन सीज करने के आरोप लगाए।
प्रदर्शन कर रहे कारोबारियों का कहना था कि वन विभाग द्वारा नदी क्षेत्र में छापेमारी के दौरान उनकी गाड़ियों को उस समय पकड़ लिया गया, जब सभी वाहन वैध टोकन और रॉयल्टी के साथ संचालित हो रहे थे। कारोबारियों ने आरोप लगाया कि विभाग की कार्रवाई नियमों के खिलाफ और जानबूझकर परेशान करने वाली है।
खनन कारोबारी अनंत जैन ने बताया कि उनकी गाड़ी 22 मई की सुबह निर्धारित टोकन के आधार पर नदी क्षेत्र में गई थी और सरकार को विधिवत रॉयल्टी भी जमा की गई थी। इसके बावजूद वन विभाग की टीम ने वाहन को पकड़ लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने गोलियां चलाईं और पत्थरबाजी भी की, जिससे चालक जान बचाकर मौके से भागने को मजबूर हो गया।
कारोबारियों का कहना है कि घटना के तुरंत बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को टोकन, रवन्ना और अन्य वैध दस्तावेज दिखाए, लेकिन इसके बावजूद वाहन नहीं छोड़ा गया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि डीएफओ ने फोन पर साफ कहा कि वे टोकन सिस्टम को नहीं मानते और किसी भी हालत में वाहन नहीं छोड़ा जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान कारोबारियों ने डीएफओ पर भ्रष्टाचार और खनन कारोबारियों के उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि वैध तरीके से कार्य करने वाले कारोबारियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, जिससे सरकार की छवि खराब हो रही है और राजस्व को भी नुकसान पहुंच रहा है।
कारोबारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी गाड़ियां नहीं छोड़ी गईं और मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई तो वे मुख्यमंत्री से शिकायत करने के साथ ही कानूनी कार्रवाई भी करेंगे।
वहीं पूरे मामले में डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या ने कारोबारियों के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि संबंधित वाहन बंद क्षेत्र से अवैध रूप से खनिज भर रहा था, जिस पर वन विभाग की टीम ने नियमानुसार कार्रवाई की।
डीएफओ ने बताया कि जब विभागीय टीम ने वाहन को रोका, उस समय चालक के पास कोई वैध दस्तावेज मौजूद नहीं थे और चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया था। बाद में जब वाहन को वन चौकी लाया गया, तब संबंधित लोग टोकन और अन्य दस्तावेज लेकर पहुंचे।
उन्होंने दावा किया कि वाहन पकड़े जाने के बाद टोकन कटवाया गया, जबकि वाहन पहले से ही बंद क्षेत्र में खनिज परिवहन कर रहा था। डीएफओ ने स्पष्ट कहा कि वन विभाग की कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई है और अवैध खनन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा।
रामनगर में खनन कारोबारियों और वन विभाग के बीच बढ़ता यह विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। एक ओर कारोबारी विभागीय कार्रवाई को उत्पीड़न बता रहे हैं, वहीं वन विभाग इसे अवैध खनन के खिलाफ सख्त अभियान का हिस्सा बता रहा है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और संभावित जांच पर टिकी हुई है।


