अन्न के बाजार को बड़े कारपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का गुलाम बनाने वाले तीन कृषि कानूनों के खिलाफ भारत बंद को लेकर करी प्रेस वार्ता।

रोशनी पांडेय – सह सम्पादक

रामनगर में किसान अध्यक्ष दिवान कटारिया के नेतृत्व में 27 सितम्बर को भारत बंद को लेकर की एक प्रेसवार्ता आपको बता दे कि पिछले 10 माह से देश के किसान देश की खेती किसानी और अन्न के बाजार को बड़े कारपोरेट और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का गुलाम बनाने वाले तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली के बार्डरों व देश भर में संघर्ष के मैदान में डटे हैं. यह आंदोलन नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा अपने चहेते कारपोरेटों के हाथ देश के संस्थानों, प्राकृतिक संसाधनों की नीलामी व उन्हें लम्बे समय के लिए किराए पर चढ़ाए जाने के खिलाफ भी है। इस सरकार ने 155 वर्षों के संघर्ष के बल पर प्राप्त अम अधिकारों को खत्म कर मजदूरों की नई गुलामी के 4 श्रम कोड बिल पास कर दिए हैं।

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वही दिवान कटारिया ने बताया की सरकार ने खुदरा बाजार में 100 प्रतिशत एफडीआई के जरिये देश के खुदरा बाजार पर कारपोरेट हमला तेज कर दिया है. पेट्रोल, डीजल, गैस की कीमतों में भारी लूट, महंगाई, देश में खत्म होते रोजगार या शिक्षा व स्वास्थ्य के निजीकरण के कारण उनका आम आदमी की पहुंच से दूर हो गया है जिसकी वजह से “भारत बंद” देश के सम्मुख खड़े इन सभी सवालों को संबोधित कर रहा है।

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