अपनी घोषणा के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण बिल को विधानसभा में पेश न करने पर आक्रोश जताया।

ख़बर शेयर करें -

नाजिम कूरेशीसंवाददाता

 

उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तराखंड विधानसभा का सत्र समय से पहले ही अवसान करने पर तथा अपनी घोषणा के बावजूद राज्य आंदोलनकारियों के लिए 10% क्षैतिज आरक्षण बिल को विधानसभा में पेश न करने पर आक्रोश जताया। उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलनकारियै की यहां शिवा होटल में हुई एक बैठक में राज्य आंदोलनकारियों के 10% क्षैतिज आरक्षण के सवाल पर राज्य सरकार के‌ रुख को आंदोलनकारियों के साथ धोखा बताया है। आज यहां पर आयोजित एक बैठक में जिसमें कांग्रेस उपाध्यक्ष और राज्य आंदोलनकारी धीरेंद्र प्रताप, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महामंत्री और राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी, पत्रकार और आंदोलनकारी हरिमोहन, आंदोलनकारी और स्वाधीनता सेनानी आश्रित भारत नंदन भट्ट, मनीष कुमार आदि ने ने राज्य सरकार द्वारा हाल के विधानसभा सत्र में 10% से अधिक आरक्षण बिल पास ना किए जाने की कड़ी आलोचना की और राज्य सरकार के इस रूप को राज्य निर्माण आंदोलनकारी विरोधी करार दिया।

यह भी पढ़ें 👉  रामनगर में कांग्रेस का प्रदर्शन, भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ की गिरफ्तारी की मांग।

 

 

धीरेंद्र प्रताप और प्रभात ध्यानी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह राज्य निर्माण आंदोलनकारियों का अपमान है उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण में की जा रही हिला हवाली की भी आलोचना की। हरिमोहन ने सरकार के आंदोलनकारियों के इतिहास को पाठ्यक्रम में लिए जाने के फैसले का स्वागत किया परंतु इसे भी एक कोरी घोषणा बताया और इस संबंध में कोई गंभीर प्रयास ना किए जाने पर सरकार पर निशाना साधा।

यह भी पढ़ें 👉  “देवभूमि अब बन रही है खेलभूमि”-मुख्यमंत्री

 

इस बैठक में राज्य आंदोलनकारियों ने गैरसैंण में विधानसभा सत्र न किये जाने पर सरकार की आलोचना की और आंदोलनकारियों को सम्मानजनक पेंशन से दिए जाने की मांग की। उन्होंने उत्तराखंड में लोकपाल बिल ना लाए जाने की आलोचना की और अंकिता भंडारी, किरण नेगी हत्याकांड के दोषियों को राज्य सरकार द्वारा बचाए जाने की नीति की आलोचना की ।जगदीश हत्याकांड में सरकार की संवेदनहीनता एंव चुप्पी पर आक्रोश जताते हुए परिजनों को नौकरी, उचित मुआवजा दिए जाने की भी मांग की।

यह भी पढ़ें 👉  व्यय-वित्त समिति बैठक: खेल, पर्यटन और आधारभूत परियोजनाओं को मंजूरी।

 

 

इस बैठक में मसूर राज्य आंदोलनकारी, इतिहासकार ,साहित्यकार शेखर पाठक की किताब हरी-भरी के अंग्रेजी अनुवाद को कमलादेवी चट्टोपाध्याय बुक अवार्ड 2022 को पुरस्कार मिलने पर बधाई दी गई।

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *