“किताबों के नाम पर लूट का पर्दाफाश!”—प्रशासन का छापा, 46 स्कूल कटघरे में।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
हल्द्वानी। जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण पर प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच के बाद 46 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने सभी स्कूलों से 11 अप्रैल 2026 तक जवाब तलब किया है।
🔍 जांच में क्या-क्या सामने आया
सिटी मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता में गठित जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं—
- अभिभावकों को NCERT की सस्ती किताबों के बजाय महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया गया
- स्कूलों द्वारा तय दुकानों से ही कॉपी-किताब खरीदने के निर्देश दिए गए
- बुक सेलर्स और स्कूलों के बीच गठजोड़ के साक्ष्य मिले
- कई दुकानों से स्कूलों की पर्चियां बरामद हुईं
- Central Board of Secondary Education के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
- स्कूलों की वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर और अनिवार्य सूचनाएं सार्वजनिक नहीं की गईं
⚠️ नोटिस में क्या कहा गया
सीईओ द्वारा जारी नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यह कृत्य शासन/प्रशासन और CBSE के नियमों का उल्लंघन है और इसे गंभीरता से लिया गया है।
सभी संबंधित स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 11 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे तक अपना लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें।
🚨 नहीं दिया जवाब तो होगी सख्त कार्रवाई
यदि तय समय में जवाब नहीं दिया गया या जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो—
- स्कूलों की मान्यता/संबद्धता पर कार्रवाई
- विधिक कार्रवाई
- अन्य प्रशासनिक दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे
📋 इन 46 स्कूलों को भेजा गया नोटिस
(संक्षेप में प्रमुख नाम)
वेदान्तम इंटरनेशनल स्कूल, ग्रीन सिटी पब्लिक स्कूल, आदर्श पब्लिक स्कूल, आरूष पब्लिक स्कूल, न्यू बाल संसार पब्लिक स्कूल, चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल, ईमैनुअल पब्लिक स्कूल, ग्रीन वुड पब्लिक स्कूल, हिमालया विद्या मंदिर, इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, देवभूमि पब्लिक स्कूल, किड्स केयर, किंग्सफोर्ड, काठगोदाम पब्लिक स्कूल, लिटिल जीनियस, मानस पब्लिक स्कूल, नेशनल पब्लिक स्कूल, शेमफोर्ड, सेंट लुक्स, सेंट जार्ज, सनराइज, विवेकानंद, वुडलैंड, होली एंजेल, स्प्रिंग फील्ड, दून पब्लिक स्कूल सहित कुल 46 स्कूल शामिल हैं।
👉 निष्कर्ष
जिला प्रशासन ने साफ संकेत दे दिया है कि शिक्षा के नाम पर किसी भी तरह की मनमानी और अभिभावकों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अब नियमों से ही चलेगी शिक्षा व्यवस्था—वरना कार्रवाई तय है।





