उधम सिंह राठौर – सम्पादक
“मानसिक स्वास्थ्य”
वर्ष 2000 के पश्चात हमारी जीवनशैली में भारी परिवर्तन हुए, जिसके कारण मानसिक बीमारीयाँ जो कि अन्य बीमारीयों की अपेक्षा में कम थी, अचानक बढ़ी ( मुख्यतः डिप्रेशन, नींद ना आने की बीमारी ओवसेसिव कम्पलसिव डिसआर्डर OCD, एन्जाइटी डिस्आर्डर, नशे धूमपान से होने वाली बीमारीयों, रिग्जीरोफेनिया इत्यादी) और कोविड-19 महामारी में तनाव, डिप्रेशन के कारण इनकी संख्या में बहुत वृद्धि हुई आज पूरी दुनिया में 100 करोड़ के अधिक लोग किसी ना किसी मानसिक बीमारी या किसी ना किसी नशे की लत से जुझ रहे हैं, और ये आकड़े चौकाने वाले हैं। भारत में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के माध्यम से सरकार एंव स्वास्थ्य विभाग लगातार मानसिक स्वास्थ्य के बारे मे आम जनमानक तक आवश्यक सूचनाएं प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।
• मानसिक अस्वस्थता के कारण
(1) अकेलापन (2) बिखरे हुए परिवार (3) नशीले पदार्थों का सेवन (4) गरीबी (5) अपराध (6) आनुवांशिक कारण (7) मनोवैज्ञानिक आघात (8) आर्थिक समस्याएं (9) सेक्सुअली या शारीरीक प्रताडना (10) किसी करीबी की मृत्यु (11) तलाक इत्यादी हैं।
• दिमाग पर असर- दिमाग में हार्मोन असंतुलन हो जाता है।
“मानसिक बीमारी के लक्षण”
(1) अपने मे ही खाये रहना, एकाग्रता की कमी (2) समस्याओं का सामना ना कर पाना, तनाव लेना (3) दिमाग में लड़ाई हिंसा का विचार आना (4) नींद ना आना (5) अपने आप से ही बड़बड़ाना (6) खुद का ख्याल ना रख पाना (7) चुपचाप रहना या बहुत गुस्सा करना (8) किसी भी काम में अपनी गलती महसूस करना (9) मर जाने का मन करना (10) आवाजें सुनाई देना (11) जो लोग या वस्तु है ही नहीं, उनका दिखाई देना (12) कार्यक्षेत्र में निरन्तर गिरावट आना (13) बार- बार चैक करना ( जैसे दरवाजा बन्द है कि नही) (14) बार बार हाथ धोना (15) अत्यधिक डर लगना (16) हमेशा चिंता करना इत्यादी हैं।
• ऐसे बचें मानसिक तनाव से
(1) अपनी निजी और प्रोफेशनल जिंदगी को अलग-अलग रखें। (2) अपने काम आराम और व्यायाम मे तालमेल बनाए (3) अधिक से अधिक खुश रहने की कोशिश करें और जीवन की अच्छी घटनाओं को ज्यादा याद रखें (4) सप्ताह या महीने में एक-दो बार कही बाहर घूमने जाएं (5) परिवार के साथ समय बिताएं (6) प्रतिदिन व्यायाम करें (7) किसी भी प्रकार का नशा ना करें तथा ऐसे मित्रों इत्यादी से भी दूर रहें जो नशा करते हैं। (8) अपनी गलती स्वीकारना सीखें (9) अनावश्यक तनाव ना लें (10) सकारात्मक सोच रखें (11) अपनी रचनात्मक कला को कोई रूप दें- खेलकूद पेटिंग, गार्डनिंग, टूरिज्म, म्यूजिक, रीडीगं जैसे शौक विकसित करें (12) समय-समय पर हेल्थ चैकप जरूर करें।
जब व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी से ग्रसित होते हैं लेकिन समुचित जानकारी के अभाव में इस और ध्यान नहीं देते तथा अकसर छुपाने का प्रयास करते है, जिससे समस्या गंभीर रूप धारण कर लेती है। मानसिक बीमारी होने का कारण दीमाग में केमिकल इंबैलेंस होना है और समय पर सही इलाज तथा मानसिक रोग विशेषज्ञ को दिखाने से इंसान ढीक हो सकता है अब (जैसे SSRI, Anti Psychotics, TCA इत्यादी) तो बहुत अच्छी दवाईयां उपलब्ध है तथा इलाज उपलब्ध है।
• मनसिक बीमारी से ग्रसित व्यक्ति को बुरा ना समझें, उसे डाटें नहीं, उसके साथ प्यार, स्नेह सम्मान और अपनेपन का व्यवहार करें।
• मनसिक बीमारी कोई अभिशाप नहीं है इसे छिपाये नहीं जितनी जल्दी मरीज मनोचिकित्सक के पास जाता है उसके इलाज की अवधि उतनी ही कम तथा रिकवरी के चांसेज उतने ही अधिक हो जाते हैं।

DR. MANI BHUSHAN PANT S CMS RAMNAGAR

















