अब उत्तराखंड में बनेंगे चैंपियन! धामी ने क्रीड़ा विश्वविद्यालय का किया शिलान्यास।

अब उत्तराखंड में बनेंगे चैंपियन! धामी ने क्रीड़ा विश्वविद्यालय का किया शिलान्यास।

अब उत्तराखंड में बनेंगे चैंपियन! धामी ने क्रीड़ा विश्वविद्यालय का किया शिलान्यास।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

हल्द्वानी। उत्तराखंड के खेल इतिहास में शनिवार का दिन एक नए अध्याय की शुरुआत बन गया। राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर हल्द्वानी के गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश को खेलों की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के प्रथम चरण के ₹43.50 करोड़ के निर्माण कार्यों का शिलान्यास करने के साथ ही विश्वविद्यालय के पहले शैक्षणिक सत्र का शुभारंभ किया।

मेजर ध्यानचंद की जयंती पर हुए इस कार्यक्रम को प्रदेश में खेल प्रतिभाओं के लिए नए युग की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य साफ है—उत्तराखंड को सिर्फ देवभूमि और वीरभूमि की पहचान तक सीमित नहीं रखना, बल्कि ‘खेलभूमि’ के रूप में राष्ट्रीय पहचान दिलाना।

अब खेल शिक्षा और ट्रेनिंग के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि अब तक उत्तराखंड के खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय खेल शिक्षा और विशेष प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था। क्रीड़ा विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने के बाद प्रदेश के युवाओं को अपनी ही धरती पर आधुनिक खेल शिक्षा, प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

सरकार की योजना इस विश्वविद्यालय को भविष्य में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करने वाले प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की है।

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ओलंपिक-2036 पर नजर, अभी से तैयार हो रहा रोडमैप

मुख्यमंत्री ने बड़ा लक्ष्य सामने रखते हुए कहा कि वर्ष 2027 के राष्ट्रीय खेलों में अधिक से अधिक पदक हासिल करने और ओलंपिक-2036 में उत्तराखंड के खिलाड़ियों की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए अभी से विशेष रोडमैप तैयार किया जा रहा है।

यानी सरकार की नजर सिर्फ अगले मुकाबले पर नहीं, बल्कि आने वाले दशक में उत्तराखंड से निकलने वाले ओलंपिक खिलाड़ियों पर है।

खिलाड़ियों के लिए छात्रवृत्ति से लेकर सरकारी नौकरी तक

राष्ट्रीय खेल दिवस पर सरकार ने खिलाड़ियों के लिए अपनी योजनाओं का खाका भी सामने रखा। मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना के तहत 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को मासिक खेल छात्रवृत्ति दी जा रही है।

वहीं मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत 14 से 23 वर्ष के खिलाड़ियों को छात्रवृत्ति के साथ खेल उपकरण खरीदने के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है।

राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए आउट ऑफ टर्न सरकारी सेवायोजन की व्यवस्था भी की गई है। इसके तहत अब तक 29 खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी जा चुकी है।

23 हाईटेक खेल अकादमियों पर काम

उत्तराखंड में खेलों का आधारभूत ढांचा मजबूत करने के लिए अलग-अलग खेलों की 23 नई हाईटेक खेल अकादमियां विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इसके साथ ही ‘एक जनपद-एक खेल’ योजना के माध्यम से प्रत्येक जिले की विशिष्ट खेल पहचान विकसित करने और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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प्रदेश का पहला बालिका स्पोर्ट्स कॉलेज लोहाघाट में संचालित किया जा रहा है, जबकि उत्तराखंड खेल नीति-2026 का ड्राफ्ट भी तैयार किया जा चुका है।

खेलों में भी AI का इस्तेमाल—‘मौली’ एप से होगी फिटनेस की निगरानी

खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में भी सरकार ने कदम बढ़ाया है। इसके लिए ‘मौली एआई एप्लीकेशन’ विकसित किया गया है। इसके माध्यम से उदीयमान खिलाड़ियों की फिटनेस का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा।

यह पहल बताती है कि सरकार अब खिलाड़ियों के प्रशिक्षण में पारंपरिक तरीकों के साथ तकनीक और डेटा आधारित मूल्यांकन को भी शामिल करने की तैयारी में है।

पदक विजेताओं और प्रशिक्षकों का सम्मान

कार्यक्रम में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को सम्मानित किया गया।

वर्ष 2024 के लिए एथलेटिक्स की अंकिता को देवभूमि उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार तथा एथलेटिक्स के लोकेश चौधरी को द्रोणाचार्य पुरस्कार प्रदान किया गया।

वर्ष 2025 में शूटिंग के अभिनव देशवाल को खेल रत्न, क्याकिंग एंड कैनोइंग के मुकेश शर्मा को द्रोणाचार्य और बॉक्सिंग के मुकेश चंद्र बेलवाल को लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार दिया गया।

दिव्यांग श्रेणी में शूटिंग के शौर्य सैनी को हिमालय रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। मॉडर्न पेंटाथलॉन की टीम श्रेणी में सक्षम प्रताप सिंह और ममता खाती तथा बॉक्सिंग की एकल श्रेणी में खुशी चंद को हिमालय खेल रत्न से सम्मानित किया गया।

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धामी का खिलाड़ियों से वादा—पैसों की कमी सपनों के बीच नहीं आएगी

मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि वे मैदान में पूरी मेहनत और समर्पण के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि साधनों की कमी, आर्थिक कठिनाई या अवसरों का अभाव किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी के सपने में बाधा न बने।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं में प्रतिभा और ऊर्जा की कोई कमी नहीं है। जरूरत सिर्फ उन्हें सही मंच, आधुनिक संसाधन और बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है।

‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को खेलों से जोड़ने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ के पानी और पहाड़ की जवानी का सही दिशा में उपयोग करने के लिए खेल एक सशक्त माध्यम हैं। उनका लक्ष्य है कि पर्वतीय क्षेत्रों से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं गांव छोड़ने को मजबूर न हों, बल्कि अपने ही क्षेत्र में प्रशिक्षण और अवसर प्राप्त कर राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचें।

राष्ट्रीय खेल दिवस पर हल्द्वानी से शुरू हुआ यह नया अध्याय आने वाले वर्षों में उत्तराखंड को देश की प्रमुख खेल शक्तियों में शामिल करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

सरकार का संदेश साफ है—मैदान तैयार है, अब उत्तराखंड के युवाओं की बारी है कि वे पसीने से पदक और मेहनत से इतिहास लिखें।

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