जब मजहब की दीवारें टूटीं, राखी के धागों में बंधा भाईचारा—डॉ. जफर सैफी और अरमान ने दिया कौमी एकता का संदेश।

जब मजहब की दीवारें टूटीं, राखी के धागों में बंधा भाईचारा—डॉ. जफर सैफी और अरमान ने दिया कौमी एकता का संदेश।

जब मजहब की दीवारें टूटीं, राखी के धागों में बंधा भाईचारा—डॉ. जफर सैफी और अरमान ने दिया कौमी एकता का संदेश।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर। रक्षा बंधन का पर्व सिर्फ भाई-बहन के रिश्ते का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और इंसानियत का संदेश भी देता है। रामनगर में समाजसेवी डॉ. जफर सैफी और उनके स्टूडेंट पुत्र मो. अरमान सैफी हर वर्ष रक्षा बंधन पर अपनी मुंहबोली बहनों से राखी बंधवाकर इसी भाईचारे और कौमी एकता की मिसाल पेश करते हैं।

 

 

 

रक्षा बंधन के दिन मोहल्ला बम्बाघेर स्थित डॉ. जफर सैफी के आवास पर अलग ही रौनक देखने को मिलती है। यहां अलग-अलग शहरों से पहुंचने वाली मुंहबोली बहनें डॉ. जफर सैफी और उनके पुत्र अरमान की कलाइयों पर राखी बांधती हैं। इस दौरान घर में उनकी पत्नी एवं पूर्व सभासद रुबीना सैफी द्वारा तैयार राजमा-चावल, दही-बड़े और दही-फुलकी जैसे पकवानों की खुशबू भी पर्व की खुशियों में चार चांद लगा देती है।

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डॉ. जफर सैफी को राखी बांधने के लिए रामनगर से वंदना वर्मा, प्रिया वर्मा और नरेंद्र कौर, बरेली से प्राची शर्मा, रुद्रपुर से बेबी मसीह, गाजियाबाद से सोनम मसीह पहुंचीं। वहीं उनके पुत्र अरमान सैफी को राखी बांधने के लिए काशीपुर से महज 7 वर्षीय शिखा कश्यप भी पहुंची।

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इन बहनों में वंदना, प्रिया और साक्षी ने अपने-अपने इकलौते भाइयों को सड़क हादसों में खो दिया है। ऐसे में भाई के रिश्ते की कमी और सूनी कलाई की कसक को महसूस करते हुए डॉ. जफर सैफी और उनके पुत्र अरमान ने इन बहनों को अपना बहन का रिश्ता दिया। हर वर्ष उनके हाथों से राखी बंधवाकर वे न सिर्फ इस रिश्ते को निभाते हैं, बल्कि इंसानियत और मोहब्बत का संदेश भी समाज तक पहुंचाते हैं।

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राखी बांधते समय भावुक हुए माहौल में भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और अपनापन साफ नजर आता है। यह पहल उन लोगों के लिए भी प्रेरणादायी है, जो मानते हैं कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि विश्वास, स्नेह और इंसानियत से भी बनते हैं।

 

 

डॉ. जफर सैफी और अरमान सैफी का यह प्रयास रक्षा बंधन के पर्व को एक व्यापक सामाजिक संदेश देता है—मजहब अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है; रिश्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन मोहब्बत की भाषा सबकी एक है।

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