
जीवनदायी हिमालय के बदलते स्वरूप पर विशेषज्ञों ने जताई चिंता, संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों पर जोर।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। सवाल्देह गांव स्थित आहाना रिजॉर्ट में आयोजित ‘जीवनदायी हिमालय’ सत्र में हिमालय के बदलते स्वरूप, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और बढ़ते पर्यटन को लेकर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम में प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. शेखर पाठक और पद्मश्री अनूप साह ने हिमालय की वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य की चुनौतियों पर विचार साझा किए।
डॉ. शेखर पाठक ने कहा कि बीते दशकों में हिमालयी क्षेत्रों में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं। जलवायु परिवर्तन, अनियोजित विकास और प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव हिमालय के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। उन्होंने चिपको आंदोलन की सीख को आज भी प्रासंगिक बताते हुए प्रकृति और स्थानीय समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया।
पद्मश्री अनूप साह ने अपने लंबे फोटोग्राफी अनुभव के जरिए हिमालय में आए बदलावों को सामने रखा। उन्होंने कहा कि कैमरे में कैद हिमालय की तस्वीरें केवल प्राकृतिक सुंदरता का दस्तावेज नहीं, बल्कि बदलते पर्यावरण की कहानी भी हैं।
वक्ताओं ने कहा कि हिमालय करोड़ों लोगों के जीवन, जल और पर्यावरण से सीधे जुड़ा प्राकृतिक आधार है। इसके संरक्षण के लिए सरकार के साथ स्थानीय समुदायों, युवाओं और पर्यटकों की भागीदारी भी जरूरी है। सत्र में विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन कायम रखते हुए हिमालय को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने का संदेश दिया गया।







