विधानसभा में विचलन से तदर्थ भर्ती को मंजूरी देने का रहा इतिहास।

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उधम सिंह राठौर – प्रधान सम्पादक

विधानसभा में विचलन से तदर्थ भर्ती को मंजूरी देने का रहा है इतिहास स्वामी काल से शुरू हुआ दौर एनडी तिवारी राज मे बना रिकॉर्ड खंडूरी ने कुर्सी संभालते ही दी मंजूरी हरीश रावत ने भी बनाया रिकॉर्ड अकेले पुष्कर सिंह ने सिर्फ 1 साल के लिए मंजूरी देकर स्पीकर के अधिकारों को क्या नियंत्रित कोई पहली बार नहीं दी गई है विचलन से मंजूरीया देहरादून उत्तराखंड विधानसभा में तदार्थ भर्ती को विचलन से मंजूरी कोई 2022 पहली बार नहीं दी गई राज्य के लगभग हर सीएम के कार्यकाल मैं के मंजूरी दी गई हैं ऐसे कोई हम नहीं कह रहे बल्कि स्पीकर ऋतु खंडूरी की बनाई डीके कोटिया समिति की रिपोर्ट और खुद विधानसभा के हाई कोर्ट में दाखिल किया गया काउंटर ने इस हकीकत का विस्तार से जिक्र किया गया है।

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सबसे पहली बार 2001 में तत्कालीन सीएम नित्यानंद स्वामी ने 53 पदों पर तदार्थ भर्ती को विचलन से ही मंजूरी दी इसके बाद कांग्रेस सरकार में सीएम एनडी तिवारी ने तो विचलन से तदर्थ भर्ती को मंजूरी देने का रिकॉर्ड ही बना दिया उन्होंने 2002 में 28 वर्ष 2003 में 5 वर्ष 2004 में 18 वर्ष 2005 में 8 वर्ष 2006 में भी जाते जाते 21 पद को मंजूरी दी इसके बाद वर्ष 2007 में सीएम बने बीसी खंडूरी ने तो कुर्सी संभालने के महज कुछ महीनों के भीतर ही 27 पदों पर तदर्थ भर्ती को मंजूरी दी इन्हीं भर्तियों में उन्होंने अपने पर्यटन सलाहकार प्रकाश सुमन ध्यानी की बेटी अपने खासम खास महेश्वर बहुगुणा के बेटे त्रिवेंद्र रावत के करीबी अनिल नेगी की पत्नी मेयर गामा की पत्नी केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट के साले समेत कई अपने करीबियों को विधानसभा में बोकडौर से भर्ती कराया इसके बाद वर्ष 2014 में सात और 2016 में 149 पदों पर तदर्थ भर्ती की विचलन से मंजूरी तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने दी यही परंपरा 2022 में भी जारी रही।

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विचलन से सीएम की ओर से दी गई मंजूरी का अर्थ यह नहीं कि कुछ भी कर लिया जाए भर्ती को लेकर जो भी प्रक्रिया अपनाई जाती है वह स्पीकर के स्तर पर ही होती है पहली बार सीएम पुष्कर सिंह धामी नहीं स्पीकर की मनमानी को नियंत्रित किया सख्त व्यवस्था बनाई की पर्दा की मंजूरी सिर्फ 1 साल के लिए दी गई जिसे दिसंबर 2022 में ही समाप्त हो जाना था इस तरह उत्तराखंड के इतिहास में अकेले पुष्कर सिंह धामी 80cm हैं जिन्होंने विधानसभा में स्पीकर को भी भर्ती के मामले में नियात्रत कर एक मिसाल कायम की है

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