प्राइवेट विद्यालयों के संचालकों की बैठक तहसील सभागार कार्यालय में एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी खंड शिक्षा अधिकारी भास्कर पांडे द्वारा एनसीआरटी किताबों को लेकर की गई जिसमें सख्त निर्देश दिए

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शादाब हुसैन – सवाददाता

बाजपुर। प्राइवेट विद्यालयों के संचालकों की बैठक तहसील सभागार कार्यालय में एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी खंड शिक्षा अधिकारी भास्कर पांडे द्वारा एनसीआरटी किताबों को लेकर की गई जिसमें सख्त निर्देश दिए गए हैं कि प्राइवेट किताबों को स्कूल में लगाने के लिए अभिभावकों पर दवा ना बनाया जाए और एनसीआरटी किताब ही लगाई जाए।एसडीएम राकेश चंद्र तिवारी ने प्राइवेट विद्यालय के संचालकों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि सभी प्राइवेट स्कूल अपने विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए एनसीआरटी की बुक लगाएं प्राइवेट बुको को लगाने के लिए अभिभावकों पर दबाव न डाले जाए अन्यथा कार्रवाई करनी पड़ेगी।उत्तराखंड बोर्ड हो या सीबीएसई बोर्ड उन्होंने कहा कि सरकार का भी आदेश से और जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के अनुसार प्राइवेट विद्यालयों में एनसीआरटी बुक लगाने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।

 

 

आपके द्वारा अभिभावकों को पर दबाव बनाया जा रहा है कि प्राइवेट बुके बुक स्टोर से लेकर आएं जबकि आपके द्वारा एनसीआरटी की किताबें नहीं दी जा रही है बच्चों के पढ़ने के लिए।उन्होंने सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि सभी प्राइवेट स्कूल एनसीआरटी की किताबें अपने स्कूलों में लगाएं।और अपने स्कूलों की बसों को बिना रजिस्ट्रेशन बिना इंश्योरेंस के ना चलाएं मेरे द्वारा छापामार अभियान चलाया जिसमें कई वाहन गलत पाए गए जो बच्चों की जिंदगीयौ के लिए खतरनाक है।सभी स्कूल अपने स्कूल में बच्चों को लाने के लिए और वापस अपने घर छोड़ने के लिए वाहनों की फिटनेस इंश्योरेंस ड्राइविंग लाइसेंस के साथ वाहनों को लगाया जाए।

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उन्होंने सख्त निर्देश दिए हैं 15 साल पुरानी बसों को किसी भी कीमत पर चलने नहीं दिया जाएगा बच्चों की जिंदगीयौ के साथ खिलवाड़ नहीं करने देंगे।वही खंड शिक्षा अधिकारी भास्कर पांडे द्वारा प्राइवेट विद्यालयों में एनसीआरटी किताबों की जांच के लिए चार टीमों का गठन किया गया है जो छापामार अभियान चलाएंगे।
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इनसेट

बाजपुर।बाजपुर के सभी नामचीन प्राइवेट स्कूलों के कोर्स कक्षा 5 से लेकर 10 तक के 5000 से लेकर 12000 तक का कोर्स आ रहा है अभिभावकों की प्राइवेट स्कूल वालों ने कमर तोड़ कर रख दी है बच्चों को पढ़ाना आज की डेट में बहुत बड़ा जोखिम उठाना पड़ रहा है। प्राइवेट स्कूलों के संचालकों द्वारा हर साल कोर्स की किताबें बदलती जाती है और इसके साथ ही इस महंगाई के दौर में प्राइवेट बुक स्टोर स्वामियों द्वारा अभिभावकों की जेवो पर डाका डाला जा रहा है।
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इनसेट

बाजपुर। विधानसभा क्षेत्र में लगभग तीन दर्जन नामचीन प्राइवेट स्कूल है जिनकी एडमिशन फीस एलकेजी की 5000 से लेकर 10 तक की एडमिशन फीस 25000 है। शिक्षा के के मंदिर के नाम पर प्राइवेट स्कूल स्वामियों द्वारा बच्चों को पढ़ाने के नाम पर अभिभावकों को एडमिशन फीस के नाम पर सरेआम लूटा जा रहा है सरकार द्वारा प्राइवेट स्कूलों की एडमिशन फीस को लेकर एवं शिक्षा ग्रहण करने की फीस को लेकर कोई कानून नहीं बनाया गया जिस पर प्राइवेट स्कूलों की मनचाही दूध की जा रही है।जबकि उत्तराखंड सरकार उत्तराखंड को शिक्षा का हब बनाना चाहती है। शिक्षा को लेकर सरकार को कानून बनाकर प्राइवेट स्कूल स्वामियों पर नकेल लगाई जा सके।इतना ही नहीं प्राइवेट स्कूल स्वामियों द्वारा अभिभावकों पर फीस के लिए भी बड़ा दबाव बनाया जाता है।फीस जमा न करने की दशा में बच्चों को स्कूल से बाहर कर दिया जाता है।इस महंगाई के दौर में अभिभावक जैसे तैसे करके अपने बच्चों के पढ़ाने के लिए अपना पेट काटकर बच्चों की फीस एवं एडमिशन फीस जमा करते हैं लेकिन प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा अभिभावकों के लिए कोई भी रियाद फीस जमा करने के लिए नहीं की जाती है।
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