रामनगर में विभागीय मिलीभगत का खेल, दिनदहाड़े काट दिए गए आम-लीची के पेड़।

रामनगर में विभागीय मिलीभगत का खेल, दिनदहाड़े काट दिए गए आम-लीची के पेड़।

 

वन–उद्यान–राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल, पर्यावरणीय अपराध पर पर्दा डालने की आशंका

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

रामनगर।
फल पट्टी क्षेत्र के ग्राम हिम्मतपुर डोटियाल में मुख्य मार्ग पर स्थित उत्तरांचल नर्सरी के पास आम और लीची के फलदार वृक्षों का अवैध कटान केवल कानून उल्लंघन नहीं, बल्कि वन, उद्यान और राजस्व विभाग की संदिग्ध चुप्पी और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

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चौंकाने वाली बात यह है कि जिस क्षेत्र में उद्यान विभाग द्वारा पहले से ही फलदार वृक्षों के कटान पर रोक लगी हुई है, उसी स्थान पर दिनदहाड़े तीन फलदार पेड़ों को खुलेआम काट दिया गया, और जिम्मेदार विभागों को भनक तक नहीं लगी — या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई।

स्थानीय ग्रामीणों का साफ आरोप है कि भारी औजारों और लंबे समय तक चली कटान की प्रक्रिया बिना विभागीय संरक्षण के संभव ही नहीं। यदि निगरानी सक्रिय होती तो समय रहते कार्रवाई हो सकती थी, लेकिन किसी भी विभाग की सक्रियता मौके पर नजर नहीं आई।

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घटना के बाद आम पोखरा रेंज के रेंजर पूरन सिंह खनायत और राजस्व उप निरीक्षक मुन्नी कुमाल्टा मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंच चुकी थी। ग्रामीणों का कहना है कि बाद की यह कार्रवाई महज़ औपचारिकता और दिखावे से अधिक कुछ नहीं।

अब सवाल सिर्फ पेड़ कटने का नहीं, बल्कि व्यवस्था की जवाबदेही का है—

  • ❓ कटान के वक्त विभागीय अमला कहां था?

  • ❓ क्या दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है?

  • ❓ या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा?

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यदि समय रहते दोषियों पर कठोर कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई, तो यह स्पष्ट माना जाएगा कि यह लापरवाही नहीं, बल्कि संगठित मिलीभगत के तहत पर्यावरण का कत्ल है।

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