हिमालयी राज्यों की साझा नीति पर धामी का जोर, सहयोग से होगा सतत विकास का रास्ता तय।

हिमालयी राज्यों की साझा नीति पर धामी का जोर, सहयोग से होगा सतत विकास का रास्ता तय।

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

देहरादून, 24 अप्रैल 2026:
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि हिमालयी राज्यों को अपनी समान भौगोलिक, पर्यावरणीय और सामाजिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आपसी सहयोग और अनुभवों के आधार पर नीतियों का निर्माण करना चाहिए।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में हिमालयी राज्यों के समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद की पहली बैठक आयोजित की गई, जिसमें क्षेत्रीय विकास को गति देने और साझा चुनौतियों के समाधान के लिए विस्तृत मंथन हुआ।

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मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि “इकॉनोमी और ईकोलॉजी” के बीच संतुलन बनाते हुए मानव जीवन स्तर को बेहतर बनाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड जैव विविधता और प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है, जहां हिमालय और औषधीय पौधों के संरक्षण के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।

बैठक में जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन, जलवायु परिवर्तन, आपदा प्रबंधन, पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि अन्य हिमालयी राज्यों की “बेस्ट प्रैक्टिस” का अध्ययन कर उन्हें राज्य में लागू किया जाए।

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मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने कहा कि हिमालयी राज्यों को एकीकृत रणनीति के तहत कार्य करने की आवश्यकता है, जिससे पूरे देश को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग को भी जरूरी बताया।

बैठक में विधायक किशोर उपाध्याय, पूर्व डीजीपी अनिल रतूड़ी सहित कई विशेषज्ञों ने हिमालयी पारिस्थितिकी, नदियों के प्रवाह, बुग्यालों के संरक्षण और आजीविका बढ़ाने पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए।

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विशेषज्ञों ने हिमालयी राज्यों के लिए संयुक्त टास्क फोर्स बनाने, वैज्ञानिक अध्ययन को बढ़ावा देने और प्राकृतिक व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि बैठक में मिले सुझावों के आधार पर जल्द ही ठोस कार्ययोजना तैयार कर उसे जमीन पर उतारा जाएगा।

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