
खाद्य सुरक्षा विभाग पर सवाल! रामनगर में सैंपल तो लिए जाते हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट और मिलावटखोरों पर कार्रवाई का खुलासा आखिर क्यों नहीं होता?
दूध, मावा, मिठाई और मसालों के नमूने लेने तक सीमित है विभाग की कार्रवाई? जनता पूछ रही है—जांच रिपोर्ट और दोषियों पर कार्रवाई का खुलासा कब होगा?
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। दीपावली के त्योहार को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने रामनगर क्षेत्र में अभियान चलाकर दूध, मावा, मिठाई, तेल, मसालों और अन्य खाद्य पदार्थों समेत कुल 81 नमूनों की मौके पर जांच की। विभाग की ओर से कुछ नमूनों में स्टार्च पाए जाने की जानकारी दी गई, जबकि एक प्रतिष्ठान में एक्सपायरी मसाले मिलने पर उन्हें नष्ट कराया गया। लेकिन इस अभियान के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—खाद्य पदार्थों के नमूने लेने और मौके पर जांच करने के बाद उनकी रिपोर्ट तथा संबंधित कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी आम जनता को कितनी मिलती है?
सैंपल लिए जाते हैं, लेकिन रिपोर्ट का क्या होता है?
खाद्य सुरक्षा विभाग समय-समय पर बाजारों में पहुंचकर खाद्य पदार्थों की जांच करता है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों, दूध, मावे, घी, तेल और मसालों की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखने की बात भी कही जाती है। लेकिन उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल बना रहता है कि यदि किसी खाद्य पदार्थ का नमूना मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता, तो उसके बाद संबंधित दुकानदार या निर्माता के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है?
रामनगर में हाल ही में 81 खाद्य नमूनों की जांच की गई। विभाग के अनुसार, कुछ नमूनों में स्टार्च पाया गया और सभी जांचे गए नमूनों को सुरक्षित बताया गया। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ये जांचें मौके पर की गई प्रारंभिक जांच थीं या किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट भी उपलब्ध है। यदि किसी नमूने में गड़बड़ी सामने आती है, तो उसका नियमानुसार निस्तारण और कार्रवाई किस स्तर तक पहुंचती है, इसकी जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
केवल जागरूकता से कैसे रुकेगी मिलावट?
विभागीय टीम ने करीब 100 लोगों को जागरूक किया और खाद्य कारोबारियों को स्वच्छता, एक्सपायरी सामग्री की बिक्री रोकने, बिल देने तथा लाइसेंस प्रदर्शित करने के निर्देश दिए। ये कदम जरूरी हैं, लेकिन मिलावट की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए जांच के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी भी सामने आनी चाहिए।
आम उपभोक्ता जानना चाहते हैं कि पिछले अभियानों में कितने नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, कितने मामलों में नोटिस जारी हुए, कितने कारोबारियों पर जुर्माना लगा और कितने मामलों में न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष कार्रवाई की गई।
खाद्य सुरक्षा विभाग से उठते अहम सवाल
- क्या रामनगर में पहले लिए गए खाद्य नमूनों की अंतिम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती है?
- यदि किसी नमूने में मिलावट या मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है?
- पिछले एक वर्ष में रामनगर क्षेत्र में कितने नमूने मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए?
- कितने मामलों में जुर्माना, लाइसेंस संबंधी कार्रवाई या अभियोजन किया गया?
- क्या विभाग इन कार्रवाइयों का विवरण आम जनता के लिए उपलब्ध कराएगा?
जनता को चाहिए जांच का पूरा हिसाब
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सीधे आम लोगों की सेहत से जुड़ी है। ऐसे में विभागीय अभियानों की सफलता केवल नमूनों की संख्या या जागरूकता कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि जांच के निष्कर्षों और नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई से भी आंकी जानी चाहिए।
रामनगर की जनता को उम्मीद है कि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल जांच अभियान की जानकारी देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूर्व में लिए गए नमूनों की अंतिम रिपोर्ट, मानकों का उल्लंघन करने वालों पर हुई कार्रवाई और लंबित मामलों की स्थिति भी स्पष्ट करेगा।
अब सवाल यह है कि खाद्य सुरक्षा विभाग नमूने लेने के बाद उनकी रिपोर्ट और कार्रवाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करेगा या जनता को इन सवालों के जवाब का इंतजार ही करना पड़ेगा?
नोट: उपलब्ध जानकारी में पूर्व के नमूनों की अंतिम रिपोर्टों और कार्रवाई का विस्तृत रिकॉर्ड शामिल नहीं है। इसलिए विभाग पर आरोप को तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय इस खबर में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।



