गौलापार स्थित क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर का निरीक्षण कुमाऊँ आयुक्त ने किया।

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रोशनी पाण्डेय – सह सम्पादक

गौलापार स्थित सिंचाई नहर का निरीक्षण करते हुए मुख्य अभियंता चन्द्र शेखर ने आयुक्त को अवगत कराया गया कि नहर के पुनर्निमाण हेतु प्राकलन तैयार किया गया है जिसमें पाइप के माध्यम से सुरक्षित क्षेत्र से पानी को चलाया जाएगा। मुख्य अभियंता ने बताया कि क्षतिग्रस्त क्षेत्र पर पुनर्निमाण का कार्य किया जाना सम्भव नहीं है क्योंकि तकनीकी दृष्टिकोण से पुनः नहर के टूटने का खतरा बना रहेगा।

विगत वर्ष के माह अक्टूबर में आई बाढ़ से गौलापार की सिंचाई की मुख्य नहर क्षतिग्रस्त होने से गौलापार के लगभग 10 हजार कृषकों की 2.5 हजार हेक्टयर सिंचाई की भूमि प्रभावित हुई थी। नहर की मरम्मत हेतु आयुक्त द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था के निर्देश सिंचाई विभाग को दिए गए जिससे बरसात से पूर्व नहर न टूटे। इस कार्य हेतु आयुक्त द्वारा 21 लाख रुपये की धनराशि सिंचाई विभाग को आवंटित की गई थी। विदित है कि गौलापार की भूमि उपजाऊ है व वृहद पैमाने पर कृषि की जाती है। कृषकों की आर्थिकी पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े इसके लिए सिंचाई विभाग द्वारा आयुक्त द्वारा आवंटित की गई धनराशि से टूटी नहर को रिस्टोर किया गया था।

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मुख्य अभियंता सिंचाई चन्द्र शेखर द्वारा बताया गया कि क्षतिग्रस्त नहर के पुनर्निर्माण हेतु 5 करोड़ 84 लाख का आकलन तैयार शासन को प्रस्ताव प्रेषित किंग गया है। प्रस्ताव पारित होते ही शीघ्र ही कार्य शुरू कर दिया जाएगा।लीसा डिपो का किया निरीक्षण।गोलापार स्थित लीसा डिपो का निरीक्षण करते हुए आयुक्त को डिप्टी रेंजर सुरेश चन्द्र ने अवगत कराया कि लीसा की सुरक्षा हेतु फुव्वारे से एकत्रित लीसा पर पानी का छिड़काव किया जाता है जिससे नमी बनी रहे। इसके साथ ही आग को बुझाने के लिए लगे सभी एक्सटिंगुइशर क्रियाशील है। डिपो में लगे वाच टावर के माध्यम से नजर रखी जाती है व गश्त भी की जाती है।

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इस अवसर पर अधीक्षण अभियंता आर पी सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह, अधिशासी अभियंता के एस बिष्ट, सहायक अभियंता प्रमोद मिश्रा सहित ग्रामीण अर्जुन बिष्ट, हरीश चंद्र कर्नाटक, महेश चंद्र कर्नाटक आदि उपस्थित थे।

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