नगर पालिका की मिलीभगत से सरकारी जमीन खुर्द-बुर्द करने का आरोप! रामनगर में बड़ा खेल बेनकाब, कालातीत लीज की जमीन पर निर्माण से मचा हड़कंप!।

नगर पालिका की मिलीभगत से सरकारी जमीन खुर्द-बुर्द करने का आरोप! रामनगर में बड़ा खेल बेनकाब, कालातीत लीज की जमीन पर निर्माण से मचा हड़कंप!।

 

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर। रामनगर के भवानीगंज में नजूल भूमि से जुड़ा विवाद अब नगर पालिका परिषद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। लीज संख्या 155 से संबंधित भूमि पर कथित कब्जे की मंशा से निर्माण कार्य किए जाने का आरोप लगा है। मामला हाईकोर्ट से लेकर शासन और जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद शनिवार को उपजिलाधिकारी रामनगर ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को निर्माण कार्य रुकवाने और संबंधित भूमि पर नगर पालिका का बोर्ड लगाने के निर्देश दिए।

 

 

 

 

शिकायतकर्ता अजय कुमार अग्रवाल के अनुसार, विवादित संपत्ति में 916.82 वर्ग गज में बना भवन और 4 बीघा 15 बिस्वा बाग की भूमि शामिल थी। उनका दावा है कि इस संपत्ति की लीज वर्ष 1960 में ही कालातीत हो गई थी। इसके बावजूद बाग की भूमि को कथित रूप से खुर्द-बुर्द किए जाने का मामला सामने आया। शिकायतकर्ता ने इस पूरे प्रकरण में नगर पालिका की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मिलीभगत के आरोप लगाए हैं।

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2022 की मजिस्ट्रेट जांच के बाद भी विवाद बरकरार

अजय कुमार अग्रवाल के मुताबिक, वर्ष 2022 में इस मामले की मजिस्ट्रेट जांच पूरी हुई थी, जिसमें नगर पालिका परिषद की ओर से अनियमितताएं बरते जाने का उल्लेख किया गया था। इसके बाद उन्होंने मुख्य न्यायाधीश, उत्तराखंड हाईकोर्ट को शिकायत भेजी, जिसे जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया गया।

पांच अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि यदि सरकार के नियमों या लीज की शर्तों का उल्लंघन हुआ है तो सरकार नियमानुसार कार्रवाई कर सकती है। इसके बाद 11 अगस्त को मुख्यमंत्री, शहरी विकास मंत्री, प्रमुख सचिव शहरी विकास, कुमाऊं आयुक्त और जिलाधिकारी नैनीताल को कार्रवाई के लिए अनुरोध भेजा गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, शासन ने जिलाधिकारी नैनीताल को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिलाधिकारी ने एक अक्टूबर 2026 को उपजिलाधिकारी रामनगर को मामले में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया।

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सरकारी जमीन पर निर्माण, फिर जिम्मेदारी से दूरी क्यों?

शिकायतकर्ता अजय कुमार अग्रवाल का आरोप है कि संबंधित भूमि पर कुछ लोगों द्वारा कब्जे की मंशा से निर्माण कार्य कराया जा रहा है। जब वह इस संबंध में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी से मिले तो कथित तौर पर उन्हें बताया गया कि यह राज्य सरकार की संपत्ति है और सरकार को ही कार्रवाई करनी चाहिए।

 

यहीं से नगर पालिका की भूमिका पर सवाल और गहरे हो गए हैं। यदि भूमि सरकारी है और उस पर अवैध निर्माण की शिकायत सामने आई है, तो संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी तय करना और भूमि को सुरक्षित करना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बावजूद कार्रवाई को लेकर स्पष्टता क्यों नहीं है और विवादित भूमि पर निर्माण की स्थिति कैसे बनी हुई है।

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एसडीएम के निर्देश से बढ़ी कार्रवाई की उम्मीद

शनिवार को अजय कुमार अग्रवाल ने उपजिलाधिकारी रामनगर से मुलाकात कर पूरे प्रकरण से अवगत कराया। उनके अनुसार, एसडीएम ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को निर्माण कार्य पर रोक लगाने और भूमि पर नगर पालिका का बोर्ड लगाने के निर्देश दिए हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि इन निर्देशों का मौके पर कितना और कब तक अनुपालन होता है। क्या निर्माण कार्य तत्काल रुकवाया जाएगा? क्या विवादित भूमि की पैमाइश और स्वामित्व संबंधी अभिलेखों की जांच कराई जाएगी? और यदि जांच में अनियमितता या सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?

 

 

 

फिलहाल, शिकायतकर्ता के आरोपों और प्रशासनिक निर्देशों के बीच नगर पालिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना भी महत्वपूर्ण है। मामले में निष्पक्ष जांच, राजस्व अभिलेखों का सत्यापन और सरकारी भूमि की सुरक्षा से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।