मुनस्यारी की ट्राउट मछली की विदेशों में बढ़ेगी मांग, केंद्रीय सचिव ने मत्स्य पालकों से किया संवाद।

मुनस्यारी की ट्राउट मछली की विदेशों में बढ़ेगी मांग, केंद्रीय सचिव ने मत्स्य पालकों से किया संवाद।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

पिथौरागढ़, 18 अक्टूबर। केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने रविवार को मुनस्यारी स्थित शीतजल मत्स्य क्लस्टर का दौरा कर ट्राउट मत्स्य पालन की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जोहार मत्स्य स्वायत्त सहकारिता एवं नामजाला ट्राउट फार्म का निरीक्षण किया और स्थानीय ट्राउट मत्स्य पालकों से संवाद कर उनकी समस्याओं, अनुभवों और संभावनाओं की जानकारी ली।

 

 

डॉ. लिखी ने मुनस्यारी क्षेत्र में रेनबो ट्राउट पालन को आजीविका के टिकाऊ विकल्प के रूप में विकसित करने में स्थानीय सहकारी समितियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि गोरी गंगा की हिमनदीय जलधाराएं और अनुकूल जल तापमान मुनस्यारी को ट्राउट उत्पादन के लिए उपयुक्त बनाते हैं। इससे क्षेत्र में पारंपरिक कृषि के साथ व्यावसायिक मत्स्य पालन को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश

सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत देशभर में शीतजल मत्स्य पालन को मजबूत करने के लिए 2,299 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके माध्यम से रेसवे, हैचरी, फीड मिल, कोल्ड स्टोरेज और फसलोपरांत प्रबंधन से जुड़ी सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। देश में 34 मत्स्य क्लस्टर अधिसूचित किए गए हैं, जिनमें पिथौरागढ़ को शीतजल मत्स्य क्लस्टर के रूप में शामिल किया गया है।

 

 

 

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सहित छह पर्वतीय राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में ट्राउट उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन क्षेत्रों में 5,600 से अधिक रेसवे, 54 हैचरी, 293 कोल्ड स्टोरेज और 260 फीड मिल स्वीकृत किए गए हैं। पिछले एक दशक में ट्राउट उत्पादन में छह गुना वृद्धि हुई है और यह लगभग 5,000 मीट्रिक टन सालाना तक पहुंच गया है।

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नेपाल को ट्राउट निर्यात से अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी संभावनाएं

उत्तराखंड ने जून 2026 में नेपाल को ट्राउट मछली का पहला अंतरराष्ट्रीय निर्यात किया। इसके साथ ही राज्य सरकार और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के बीच हुए समझौते के तहत आईटीबीपी को भी ट्राउट की आपूर्ति की जा रही है। सचिव ने इसे राज्य के मत्स्य क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे स्थानीय उत्पादकों को नए बाजार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

 

 

उत्तराखंड में मत्स्य क्षेत्र के विकास के लिए 317 करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इनमें आधुनिक मत्स्य बाजार, लैंडिंग सेंटर और सितारगंज में एकीकृत एक्वापार्क की स्थापना शामिल है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार ने 170 करोड़ रुपये के परिव्यय से ट्राउट प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसके तहत वर्ष 2028-29 तक 1,500 रेसवे, 100 मिनी हैचरी और 600 कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित करने का लक्ष्य है।

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वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग पर जोर

डॉ. लिखी ने मुनस्यारी में ट्राउट पालन की शुरुआत और मत्स्य पालकों को वैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराने में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय (आईसीएआर-डीसीएफआर), भीमताल के योगदान की सराहना की। उन्होंने मत्स्य बीज उत्पादन, रोग प्रबंधन और प्रशिक्षण के क्षेत्र में संस्थान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

 

 

 

उन्होंने कहा कि शीतजल मत्स्य पालन से किसानों की आय बढ़ाने के साथ सीमांत गांवों में रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। इससे ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने, पोषण सुरक्षा मजबूत करने और महाशीर जैसी संकटग्रस्त मत्स्य प्रजातियों के संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।

 

 

सचिव के इस दौरे को मुनस्यारी सहित उत्तराखंड के अन्य हिमालयी क्षेत्रों में ट्राउट पालन, सहकारी समितियों के सशक्तीकरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।