श्री गुरु गोविंद सिंह जी के प्रकाश पर्व पर काशीपुर में निकाला गया विशाल नगर कीर्तन।

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उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

सिक्खों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविन्द सिंह जी महाराज का 356 वां प्रकाशोत्सव जगह जगह बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। इस मौके पर काशीपुर में मोहल्ला पक्काकोट स्थित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब से विशाल नगर कीर्तन का आयोजन किया गया। नगर कीर्तन गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब से शुरू होकर मंशा देवी चौक, किला मोहल्ला, मुख्य बाजार, कोतवाली रोड, महाराणा प्रताप चौक, चीमा चौराहा, सरकारी हॉस्पिटल के बराबर वाली सड़क, उदयराज फील्ड के सामने और नागनाथ मंदिर से होते हुए वापस गुरूद्वारे में पहुंचकर समाप्त हुआ। नगर कीर्तन में गुरु के पंच प्यारो के अलावा पाकिस्तान में श्री गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान की झांकी, गतका पार्टी, भांगड़ा पार्टी आकर्षण का केंद्र रहे। इसके अलावा युवा टोली द्वारा हैरतअंगेज करतब दिखाए गए।

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आपको बताते चलें कि पूरे देशभर में कोरोना वैश्विक महामारी के चलते पिछले 2 वर्षों से नगर कीर्तन नहीं निकाला जा सका था। इसी के चलते बीते वर्ष काशीपुर में सिखों के दसवें गुरु दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी महाराज के प्रकाश पर्व को श्री गुरु नानक इंटर कॉलेज के 15 से 18 वर्ष तक के छात्रों को विद्यालय में कोरोना टीकाकरण करवा कर मनाया गया। इस बार इस विशाल नगर लीर्टन की तैयारियां बड़े ही धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ चल रही थीं।

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सिक्खों के दसवें गुरु गुरु गोविन्द सिंह जी का 356 वें प्रकाशोत्सव के अवसर पर काशीपुर के मोहल्ला पक्काकोट स्थित गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब को दुल्हन की तरह सजाया गया था। सुबह से ही नगर कीर्तन की तैयारी जोरोशोरों से चल रही थी। सुबह 10 बजे बाबा सुरेंद्र सिंह कार सेवा वालों की अगुवाई में नगर कीर्तन शुरू हुआ। नगर कीर्तन में भांगड़ा, हैरतअंगेज करतब दिखाते जांबाज़ कलाकार आकर्षण का केंद्र रहे।

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नगर कीर्तन में पंच प्यारों के वेश में छोटे बच्चों के अलावा, कोरोना वैश्विक महामारी से संबंधित कोरोना वॉरियर्स की झांकी के अलावा पंजाब की संस्कृति के रूप में पंजाबी विरसा करती छोटी स्कूली छात्राएं, पीटी करते स्कूली बच्चे, गुरवाणी करती स्कूली छात्राएं, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती झांकी, एनसीसी बैंड पेश करते स्कूली बच्चे, आजादी का अमृत महोत्सव की झांकी के अलावा विभिन्न वेशभूषाओं में सजे छोटे छोटे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे। नगर कीर्तन की तैयारी स्कूल की काफी दिनों से स्कूल की अध्यापिकाओं और अध्यापकों द्वारा की जा रही थी।


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