
कॉर्बेट के जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए उतरी संयुक्त टीम, संवेदनशील इलाकों में की सघन गश्त।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। मानसून के दौरान वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने अपनी दक्षिणी सीमा पर निगरानी बढ़ा दी है। इसी क्रम में रविवार को कालागढ़ उप प्रभाग के नेतृत्व में कॉर्बेट, अमानगढ़ टाइगर रिजर्व और तराई पश्चिमी वन प्रभाग की संयुक्त टीम ने व्यापक फ्लैग मार्च निकालकर जंगलों और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस अभियान के तहत उत्तर प्रदेश की सीमा से लेकर मालधन, ढेला और आसपास के वन क्षेत्रों तक गश्त की गई।
उप प्रभागीय वनाधिकारी बिंदर पाल के नेतृत्व में आयोजित इस संयुक्त अभियान में ढेला, झिरना और कालागढ़ रेंज के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की एसओजी यूनिट तथा अमानगढ़ टाइगर रिजर्व और तराई पश्चिमी वन प्रभाग की टीमों ने भी भाग लिया। अभियान का मुख्य उद्देश्य मानसून के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करना, अवैध शिकार और वन संपदा के अवैध दोहन पर अंकुश लगाना तथा वन विभाग की विभिन्न इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
मानसून में बढ़ जाती हैं वन्यजीवों की सुरक्षा संबंधी चुनौतियां
फ्लैग मार्च से पहले उप प्रभागीय वनाधिकारी बिंदर पाल ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को ब्रीफिंग दी। उन्होंने निर्धारित रूट प्लान और अभियान के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए बताया कि मानसून के दौरान वन क्षेत्रों में गश्त करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो जाता है। भारी बारिश से गश्ती मार्ग और वन क्षेत्रों के मोटर मार्ग क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। घनी झाड़ियों, उफनती नदियों और नालों के कारण वनकर्मियों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ऐसी परिस्थितियों में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है। इसी उद्देश्य से संयुक्त फ्लैग मार्च आयोजित किया गया, ताकि संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी के साथ-साथ विभिन्न वन इकाइयों के बीच समन्वय भी मजबूत किया जा सके।
यूपी सीमा से मालधन तक चला संयुक्त फ्लैग मार्च
संयुक्त फ्लैग मार्च का शुभारंभ कालागढ़ रेंज स्थित वन विश्राम भवन से किया गया। यहां से टीम उत्तर प्रदेश की सीमा होते हुए मीरापुर, कल्लूवाला, केरीपुर, बादीगढ़, रायपुर बैरियर, नगीना और धरमपुर पहुंची। इसके बाद जसपुर, कुंडा चौराहा, गढ़ीनेगी और मालधन होते हुए हाथीडगर चौकी, सेमलखलिया, सावल्दे और बबलिया बैरियर तक गश्त की गई।
इस दौरान वन विभाग की टीम ने जंगलों से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंपर्क कर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक किया। ग्रामीणों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि, अवैध शिकार या वन संपदा के अवैध कटान की जानकारी तत्काल वन विभाग को देने की अपील की गई।
संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी, ग्रामीणों को किया जागरूक
फ्लैग मार्च के दौरान वन विभाग की संयुक्त टीम ने संवेदनशील क्षेत्रों में चेकिंग अभियान चलाया। साथ ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया गया। वन विभाग ने लोगों से जंगलों के आसपास सतर्क रहने और वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना समय पर विभाग को देने की अपील की।
अभियान के दौरान विभिन्न वन प्रभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों ने आपसी समन्वय के साथ गश्त की। इसका उद्देश्य वन क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और मानसून के दौरान वन्यजीवों की सुरक्षा में आने वाली चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटना रहा।
ढेला में हुई अभियान की समीक्षा
संयुक्त फ्लैग मार्च के समापन पर टीम ढेला वन विश्राम भवन पहुंची, जहां उप प्रभागीय वनाधिकारी बिंदर पाल ने अभियान की समीक्षा करते हुए डी-ब्रीफिंग की। उन्होंने सभी कर्मचारियों को वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध शिकार और अवैध कटान की रोकथाम के लिए सतर्कता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के निर्देश दिए। साथ ही सभी संबंधित वन इकाइयों को आपसी समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया।
इस संयुक्त अभियान में वन क्षेत्राधिकारी ढेला ललित जोशी, झिरना के वन क्षेत्राधिकारी अभय जोशी, कालागढ़ के वन क्षेत्राधिकारी नंद किशोर रूवाली, सुरक्षा इकाई के वन क्षेत्राधिकारी संजय पांडे, उपराजिक ओम प्रकाश जोशी सहित विभिन्न रेंजों के वन दरोगा, वन आरक्षी और अन्य कर्मचारी मौजूद रहे।







