GST बचत उत्सव की चमक धुंधली, छोटे व्यापारी कर के बोझ तले दबे।

त्योहारी सीजन में ग्राहकों के लिए बड़ा तोहफा – जीएसटी स्लैब में बदलाव से रियायत।
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GST बचत उत्सव की चमक धुंधली, छोटे व्यापारी कर के बोझ तले दबे।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

रामनगर। केन्द्र सरकार द्वारा हाल ही में 9.9% तक के GST स्लैब में कटौती से उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है, लेकिन छोटे व्यापारी इससे लाभान्वित होने के बजाय कर के बोझ तले दबते जा रहे हैं।

प्रान्तीय उद्योग व्यापार मण्डल रामनगर की बैठक में इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि वस्तुओं पर कर दरें भले ही घटाई गई हों, लेकिन व्यापारी पहले ही ऊँचे कर दर पर टैक्स चुका चुके हैं। अब उस टैक्स की वापसी कैसे होगी, इस पर सरकार की ओर से कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

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बैठक में निर्णय लिया गया कि इस विषय पर अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी जब कोई समाधान नहीं निकला, तो यदि जल्द हल नहीं मिलता है, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन किया जाएगा।

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बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सत्येन्द्र आनन्द अग्रवाल, नगर अध्यक्ष दिनेश चन्द्रा, महामंत्री अनुज शर्मा, कोषाध्यक्ष हीरालाल अग्रवाल, उपाध्यक्ष अमित अग्रवाल, अपम माहेश्वरी और सचिन अरोड़ा उपस्थित रहे।

इधर, प्रदेश की अग्रणी दुग्ध सहकारी संस्था आँचल पर भी सवाल उठे। व्यापारियों ने आरोप लगाया कि दूध और मक्खन पर तो कोई राहत दी ही नहीं गई, साथ ही छोटे पैकेट वाली वस्तुओं की कीमतें भी उपभोक्ताओं के लिए कम नहीं की गई हैं। व्यापारी प्रतिनिधियों का कहना है कि यह सब महज़ दिखावा है, हकीकत में न उपभोक्ता को राहत मिल रही है और न ही छोटे व्यापारियों को।

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