सेवा, सुशासन और समर्पण पखवाड़ा बना जनसमस्याओं के समाधान का सशक्त माध्यम: मुख्यमंत्री।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” अभियान के अंतर्गत आयोजित “सेवा, सुशासन और समर्पण पखवाड़ा” प्रदेश में सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। यह अभियान प्रशासनिक कार्यप्रणाली में गुणात्मक सुधार के साथ-साथ सरकार और आमजन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने में भी सफल रहा है।
09 जुलाई 2026 तक आयोजित कार्यक्रमों की प्रगति के अनुसार प्रदेश के सभी जनपदों में 04 से 09 जुलाई के बीच कुल 73 जनसेवा शिविरों का आयोजन किया गया, जिनमें 64,192 से अधिक नागरिकों ने भाग लिया। इन शिविरों के माध्यम से शासन-प्रशासन सीधे जनता तक पहुंचा, जिससे पर्वतीय, ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ।
शिविरों के दौरान विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत 21,908 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया गया। सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अनेक योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराकर सरकार ने जनसुविधा और पारदर्शिता को और मजबूत किया।
अभियान के दौरान 5,567 शिकायतें एवं प्रार्थना-पत्र प्राप्त हुए, जिनमें से 4,901 मामलों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया। शेष मामलों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को भेजकर उनकी निरंतर निगरानी की जा रही है। इसके अलावा आय, जाति, निवास, सामाजिक श्रेणी एवं अन्य प्रमाण-पत्रों से संबंधित 2,522 आवेदन भी प्राप्त हुए।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जनता को कार्यालयों में बुलाने के बजाय स्वयं फील्ड में जाकर समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने प्रत्येक जनसेवा शिविर में निर्णय लेने में सक्षम अधिकारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने तथा शिकायतों का प्राथमिक स्तर पर ही निस्तारण करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि “सेवा, सुशासन और समर्पण पखवाड़ा” राज्य में शासन की कार्यशैली को बदलने वाला अभियान है। इसके माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक भी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ सहज रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से शासन और प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास मजबूत हुआ है तथा सरकार और नागरिकों के बीच सीधे संवाद की संस्कृति विकसित होने से समस्याओं के त्वरित समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है।




