पंचवटी नासिक में साध्वी अखाड़ा महापरिषद का भव्य सम्मेलन सम्पन्न, भारत की प्रथम महिला शंकराचार्य के सान्निध्य में हुआ ऐतिहासिक आयोजन।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
नासिक (महाराष्ट्र)। तपोभूमि पंचवटी स्थित स्वामीनारायण मंदिर में साध्वी अखाड़ा महापरिषद का भव्य एवं ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों से साध्वी संतों, महामंडलेश्वरों, धर्माचार्यों तथा हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर सनातन धर्म की एकता और सांस्कृतिक चेतना का परिचय दिया।
कार्यक्रम आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी त्रिकाल भवन्ता सरस्वती जी महाराज, पीठाधीश्वर गायत्री त्रिवेणी प्रयागराज एवं परी अखाड़ा के सान्निध्य और मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। विशेष आकर्षण यह रहा कि भारत की प्रथम महिला शंकराचार्य के रूप में पूज्य गुरुदेव का संत समाज द्वारा भव्य सम्मान किया गया। देशभर से आए संत-महात्माओं, साध्वी समाज एवं श्रद्धालुओं ने उनके श्रीचरणों में उपस्थित होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सम्मेलन में महिला संतों के सम्मान, सुरक्षा, अखाड़ों में उचित प्रतिनिधित्व तथा आगामी कुंभ और अन्य धार्मिक आयोजनों में साध्वी समाज की भूमिका को लेकर व्यापक चर्चा की गई। महिला साध्वियों के लिए स्वतंत्र स्नान घाट, बेहतर सुविधाएं तथा धार्मिक गतिविधियों में अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई।
अपने आशीर्वचन में पूज्य आद्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी त्रिकाल भवन्ता सरस्वती जी महाराज ने सनातन धर्म की रक्षा, भारतीय संस्कृति के संरक्षण, नारी शक्ति के सम्मान तथा राष्ट्रहित में संत समाज की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को धर्म, सेवा और संस्कार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया।
इस अवसर पर उत्तराखंड से गढ़वाल-कुमाऊँ विकास समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री शिशुपाल सिंह रावत एवं भूमाता फाउंडेशन, पुणे (महाराष्ट्र) की संस्थापक तृप्ति देसाई विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने पूज्य शंकराचार्य जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त कर कहा कि उनके नेतृत्व में सनातन धर्म और नारी शक्ति के उत्थान हेतु चलाया जा रहा अभियान समाज को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
सम्मेलन में देश के अनेक राज्यों से आए संत-महात्माओं, साध्वी समाज, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं ने सक्रिय भागीदारी की। पूरे आयोजन में सनातन संस्कृति, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण जैसे विषय प्रमुख रूप से केंद्र में रहे।
अंत में पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के मंगलमय आशीर्वाद के साथ सम्मेलन का सफल समापन हुआ।




