उत्तराखंड के शहरों का मेगा मेकओवर! कचरे से कमाई, पानी पर डिजिटल निगरानी… मुख्य सचिव का मास्टर प्लान”

“उत्तराखंड के शहरों का मेगा मेकओवर! कचरे से कमाई, पानी पर डिजिटल निगरानी… मुख्य सचिव का मास्टर प्लान”

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

उत्तराखंड के शहर अब सिर्फ स्मार्ट नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भी बनेंगे। सचिवालय में हुई हाई लेवल बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने शहरी विकास विभाग को ऐसा रोडमैप दिया है, जो आने वाले समय में शहरों की तस्वीर बदल सकता है। कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण से लेकर हर घर तक पहुंचने वाले पानी की डिजिटल निगरानी और नगर निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने तक कई बड़े फैसले लिए गए हैं।

 

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सूत्रों के मुताबिक सरकार अब शहरी विकास को नई दिशा देने की तैयारी में है। मुख्य सचिव ने सभी नगर निकायों में 100 प्रतिशत कचरा पृथक्करण, वैज्ञानिक वेस्ट प्रोसेसिंग और पुराने डंपिंग ग्राउंड को खत्म करने के लिए तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। साफ संदेश है कि अब शहरों में कूड़े के ढेर नहीं, बल्कि आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था दिखाई देगी।

 

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बैठक में एक और अहम फैसला लिया गया। अब सिर्फ पानी के स्रोत ही नहीं, बल्कि पाइपलाइन के अंतिम छोर तक पानी की गुणवत्ता पर डिजिटल निगरानी रखने के लिए वाटर क्वालिटी सेंसर लगाए जाएंगे। साथ ही सभी नगर निकायों को डिजिटल गवर्नेंस प्लेटफॉर्म से जोड़ने की प्रक्रिया तेज होगी, जिससे नगर सेवाएं अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेंगी।

मुख्य सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि उत्तराखंड के नगर निकायों को सिर्फ सरकारी अनुदान पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को देश और विदेश के सफल शहरों का अध्ययन कराया जाएगा, ताकि वहां के मॉडल को उत्तराखंड में लागू कर नगर निकायों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

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अगर ये निर्देश तय समय पर जमीन पर उतरते हैं, तो आने वाले वर्षों में उत्तराखंड के शहरों में कचरा प्रबंधन, पेयजल व्यवस्था और डिजिटल सेवाओं में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब नजर इस बात पर होगी कि विभाग इन निर्देशों को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू करता है।