सुंदरखाल के आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन की मांग तेज, शासन-प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन।

सुंदरखाल के आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन की मांग तेज, शासन-प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों में आक्रोश, मांग पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन।

 

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर। वन ग्राम सुंदरखाल के आपदा प्रभावित परिवारों के विस्थापन और पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों ने एक बार फिर आवाज बुलंद की है। पर्वतीय भूमिहीन शिल्पकार समिति, सुंदरखाल के तत्वावधान में आयोजित बैठक में ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के प्रति नाराजगी जताते हुए विस्थापन की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग उठाई।

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बैठक में वक्ताओं ने कहा कि सुंदरखाल में लगातार आपदा का खतरा बना हुआ है। बरसात के दौरान नालों और संवेदनशील क्षेत्रों में भू-कटाव के चलते ग्रामीणों को हर समय जान-माल का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद लंबे समय से विस्थापन और पुनर्वास की मांग लंबित है। ग्रामीणों ने कहा कि प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को देखते हुए सरकार को जल्द ठोस कदम उठाने चाहिए।

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बैठक में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले रामनगर क्षेत्र के वन ग्रामों के विकास और विस्थापन को लेकर किए जाने वाले वादों को पूरा करने की मांग भी उठाई गई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि सुंदरखाल के विस्थापन की मांग पूरी होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसके लिए सड़क से लेकर शासन स्तर तक आंदोलन किया जाएगा।

 

 

बैठक में विस्थापन के मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाने और सभी प्रभावित परिवारों को एकजुट करने का निर्णय लिया गया।

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इस दौरान नेकी की दीवार के संयोजक तारा घिल्डियाल, समिति अध्यक्ष खुशाली राम, सचिव राजेंद्र कुमार, मलिकाना हक संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस. लाल, मनोनीत ग्राम प्रधान चंदन राम, गौरा देवी, सदुली देवी, मानुली देवी, अंबिका देवी, मोतुली देवी, चंदन प्रकाश, खीमानंद, मुरारीलाल, भुवन चंद्र और लीलाराम सहित अनेक ग्रामीण मौजूद रहे।