“गरीबों के आशियाने उजड़े, अब ताहिर की भूमिका पर उठे सवाल! पूछड़ी के सरकारी जमीन के कथित खेल का मास्टरमाइंड कौन?”

“गरीबों के आशियाने उजड़े, अब ताहिर की भूमिका पर उठे सवाल! पूछड़ी के सरकारी जमीन के कथित खेल का मास्टरमाइंड कौन?”

 

 

उधम सिंह राठौर -प्रधान संपादक

 

रामनगर (नैनीताल)। पूछड़ी में सरकारी वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई के बाद अब इस पूरे प्रकरण का दूसरा पहलू भी चर्चा में आ गया है। वन विभाग के बुलडोजर ने 80 से अधिक परिवारों के आशियाने जमींदोज कर दिए। किसी का वर्षों पुराना घर मलबे में तब्दील हो गया तो किसी की जिंदगीभर की कमाई मिट्टी में मिल गई। लेकिन इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर इन परिवारों को सरकारी जमीन पर बसाने और जमीन के नाम पर उनसे रकम लेने वाले कथित लोगों पर कार्रवाई कब होगी?

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स्थानीय स्तर पर ताहिर नाम के व्यक्ति की भूमिका को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं। आरोप हैं कि कुछ गरीब परिवारों ने जमीन हासिल करने के लिए अपनी मेहनत की कमाई खर्च की थी। उन्हें यह भरोसा दिलाया गया कि वे यहां अपना घर बनाकर रह सकते हैं। लेकिन अब अतिक्रमण हटने के बाद ये परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि और संबंधित व्यक्ति का पक्ष सामने आना अभी बाकी है

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इस पूरे मामले में जांच का दायरा केवल अतिक्रमण करने वाले परिवारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि सरकारी वन भूमि पर कब्जे कैसे हुए, लोगों को जमीन किसने दिलाई, कथित तौर पर किसने पैसे वसूले और इस खेल में पर्दे के पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे।

 

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर गरीब परिवारों से सरकारी जमीन के नाम पर पैसे लिए गए तो उनकी मेहनत की कमाई किसकी जेब में गई?

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प्रशासन और पुलिस को पीड़ित परिवारों की शिकायतें लेकर कथित जमीन के सौदों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। ताहिर सहित जिन लोगों के नाम शिकायतों में सामने आते हैं, उनकी भूमिका की भी कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच होनी चाहिए। यदि किसी की संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

 

अतिक्रमण हटाकर सरकारी जमीन खाली कराना प्रशासन की कार्रवाई है, लेकिन गरीबों को कथित तौर पर ठगने वालों की जवाबदेही तय करना भी उतना जरूरी है।