विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन से आगे बढ़ेगा उत्तराखंड, हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता का होगा वैज्ञानिक आकलन: सीएम धामी।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन से आगे बढ़ेगा उत्तराखंड, हिमालयी क्षेत्रों की धारण क्षमता का होगा वैज्ञानिक आकलन: सीएम धामी।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को हल्द्वानी में दैनिक जागरण की ओर से आयोजित ‘जागरण विमर्श-उत्तराखंड : आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेश की विकास यात्रा, उपलब्धियों, संभावनाओं और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए उत्तराखंड को आगे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय करीब चार हजार करोड़ रुपये के बजट से शुरू हुआ उत्तराखंड आज लगभग 1.11 लाख करोड़ रुपये के बजट तक पहुंच चुका है। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश ने प्रगति की है। उत्तराखंड तेजी से पर्यटन और फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है, जबकि राज्य की प्रति व्यक्ति आय में करीब 41 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है।

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मुख्यमंत्री ने महिलाओं और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने बताया कि ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को बाजार और नई पहचान दिलाई जा रही है। स्वयं सहायता समूहों को पांच लाख रुपये तक ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है। महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़कर स्वरोजगार व उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

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युवाओं के रोजगार पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कठोर नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। अनियमितताओं के मामलों में 100 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। साथ ही युवाओं को स्टार्टअप, स्वरोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

 

 

 

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के सामने अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और इकॉनमी एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए विभिन्न क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी व वैज्ञानिक सर्वेक्षण को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

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उन्होंने कहा कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। बड़ी परियोजनाओं के साथ उत्तराखंड की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता का संरक्षण भी जरूरी है। हरिद्वार कुंभ मेला-2027 की तैयारियों को लेकर उन्होंने कहा कि संत समाज, अखाड़ों और अन्य हितधारकों के सुझावों के आधार पर व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

 

 

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, सांसद अजय भट्ट, विधायक बंशीधर भगत, सुरेश गड़िया, शिव अरोरा, प्रताप बिष्ट, महापौर गजराज सिंह बिष्ट, महापौर दीपक बाली, दैनिक जागरण के संपादकीय अधिकारी, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, आईजी कुमाऊं निवेदिता कुकरेती, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे।