मोटर मार्ग खस्ताहाल, जान हथेली पर रख सफर करने को मजबूर लोग।

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

सल्ट – अल्मोडा जिले के विकास खंड सल्ट के रामनगर रानीखेत मोटर मार्ग मोहान से भतरौजखान तक सफर करना काफी जोखिम भरा है। लोग जान हथेली पर रखकर सफर करते हैं। ऐसे में लोगों को जोखिम भरा सफर तय करना पड़ता हैं। राज्य बनने के बाद भी उत्तराखंड में कई सरकार आयी । लेकिन मोहान भतरौजखान मार्ग की किसी ने कोई सुघ तक नहीं ली। कई स्थानो पर पैराफिट तक नहीं है।मगर चुनाव के समय क्षेत्र के जनप्रतिनिधि घोषणा करतें है। मगर चुनाव के बाद कोई सुघ नही लेता है।

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रामनगर से बद्रीनाथ गैरसैंण और रानीखेत को जोडऩे वाला मार्ग जोखिम भरा हो गया है। मार्ग में मोहान से भतरौजखान तक सडक इतने गढ्ढे , गढ्ढे नजर आ रहे हैं। सड़क गढ्ढे में तब्दील है।इस आए दिन इस मार्ग दुर्घटना हो चुकी हैं।मगर बडे राजनेता, क्षेत्र जनप्रतिनिघि इस बदहाल मार्ग से गुजरते हैं। मगर सडक के खस्ताहाल को देखने से नजर अन्दांज कर देते है। मगर सालों इस मार्ग से सुघारने की जहमत किसी ने नही उठायी। चार विघानसभा से जुडा रामनगर रानीखेत मार्ग को फिर भी क्षेत्र के जन प्रतिनिघि ने विघानसभा में बदहाल सडक का मुद्दा कभी नहीं उठाया। आज मोहान- भतरौजखान यह है कि वाहनों का चलना तो दूर आम आदमी का पैदल तक चलना।

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मोटर मार्ग खस्ताहाल, जान हथेली पर रख सफर करने को मजबूर लोग।

इस मार्ग में मोहान से सौराल, टोटाम, मछोड, और भतरौजखान तक सडक में गढ्ढे ही गढ्ढे है।इसमें दुश्वार हो चला है। कुमाऊं सबसें पुरानी सडक मोहान – रानीखेत, बद्रीनाथ, गैरसैंण को जोडने वाली सडक सबसें पुरानी सडकों में मानी जाती है। गांव के बुर्जुर्ग बताते है कि1946 में सडक बनी। 1954 में सडक में गाडी चलना आरम्भ हुआ। आज सडक की हालत बदहाल के आसूं बहाने में मजबूर हैं। सरकार ने गैरसैंण को गीष्मकालीन राजघानी तो बना दी।

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मोटर मार्ग खस्ताहाल, जान हथेली पर रख सफर करने को मजबूर लोग।

मगर गैरसैंण को जाने वाले मार्ग को दुरुस्त करने के बारे मे कभी सोचा नहीं। मगर गैरसैंण को जाने के लिए पूरी तराई क्षेत्र के अलावा प्रदेश के कई क्षेत्रों से आने वाले लोगों का इसी मार्ग से गैरसैंण आना पडता है। मगर इस मार्ग के बदहाल स्थिति कब सुघरेगी। ये कहना काफी दिलचस्प होगा।

मोटर मार्ग खस्ताहाल, जान हथेली पर रख सफर करने को मजबूर लोग।