रामनगर में बाघ का कहर: कोसी रेंज में व्यक्ति की दर्दनाक मौत, ढेला रेंज में मजदूरों की जान से खिलवाड़।

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रामनगर में बाघ का कहर: कोसी रेंज में व्यक्ति की दर्दनाक मौत, ढेला रेंज में मजदूरों की जान से खिलवाड़।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

रामनगर।
रामनगर वन प्रभाग की कोसी रेंज में बाघ के हमले से एक व्यक्ति की दर्दनाक मौत हो गई। यह घटना गुलरसिद्ध क्षेत्र के समीप बीती शाम उस समय हुई, जब व्यक्ति जंगल की ओर गया हुआ था। अचानक घात लगाए बाघ ने हमला कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया। वन क्षेत्राधिकारी शेखर चंद्र तिवारी के अनुसार विभागीय टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और क्षेत्र में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आसपास के गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया गया है। वन विभाग ने स्पष्ट अपील की है कि लोग जंगल और नदी किनारे के इलाकों में न जाएं
फिलहाल मृतक की पहचान और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि की जा रही है।

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कब जागेगा सिस्टम? ढेला रेंज बना ‘डेथ ज़ोन’

कोसी रेंज में हुई इस दर्दनाक मौत के बीच कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज से एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो प्रशासनिक लापरवाही की हदें पार करता नजर आता है।

कुछ दिन पहले इसी ढेला रेंज में एक महिला की बाघ के हमले में मौत हो चुकी है। इसके बावजूद, उसी हाई-रिस्क टाइगर मूवमेंट जोन में बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूरों से सफाई का काम कराया जा रहा है।


सुरक्षा शून्य व्यवस्था में काम को मजबूर मजदूर

हैरानी की बात यह है कि मौके पर—

  • ❌ न हथियारबंद गश्ती दल

  • ❌ न सुरक्षा कर्मी

  • ❌ न एम्बुलेंस

  • ❌ न कोई अलर्ट या रेस्क्यू सिस्टम

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लेकिन काम पूरा करने का दबाव जरूर!
ऐसी स्थिति में मजदूरों को काम पर भेजना उन्हें सीधे मौत के मुंह में धकेलने जैसा है।


“जिसकी किस्मत में होगा, वो चला जाएगा” — ठेकेदार का शर्मनाक बयान

जब मजदूरों की सुरक्षा को लेकर ठेकेदार श्याम सिंह से सवाल किया गया, तो उन्होंने अमानवीय और निंदनीय बयान देते हुए कहा—

“जिसकी किस्मत में होगा, वो चला ही जाएगा।”

यह बयान साफ दर्शाता है कि ठेकेदार और जिम्मेदार तंत्र के लिए मजदूरों की जान कितनी सस्ती है।

वहीं, जब इस गंभीर लापरवाही पर ढेला रेंज के रेंजर से जवाब मांगा गया, तो वे कोई लिखित आदेश, सुरक्षा प्रोटोकॉल या ठोस स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सके।

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यह सिर्फ लापरवाही नहीं, आपराधिक उदासीनता है

अब सवाल सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का नहीं, बल्कि आपराधिक उदासीनता (Criminal Negligence) का है—

  • 👉 जब एक महिला की जान जा चुकी है

  • 👉 जब इलाका हाई टाइगर मूवमेंट जोन घोषित है

  • 👉 जब खतरे की जानकारी सभी को है

तो मजदूरों को बिना सुरक्षा क्यों भेजा जा रहा है?
क्या कॉर्बेट प्रशासन किसी और मौत का इंतजार कर रहा है?


तत्काल कार्रवाई की मांग

इस पूरे प्रकरण पर प्रदेश के मुख्यमंत्री, वन मंत्री और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को तत्काल संज्ञान लेकर—

  • दोषी अधिकारियों

  • लापरवाह ठेकेदार

के खिलाफ कड़ी और उदाहरणात्मक कार्रवाई करनी चाहिए।

क्योंकि अगर अब भी आंखें बंद रहीं, तो अगली खबर किसी और मजदूर की मौत की होगी।