कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेंज में मौत का खेल! कॉर्बेट प्रशासन की लापरवाही से मजदूरों की जान से खिलवाड़।

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेंज में मौत का खेल! कॉर्बेट प्रशासन की लापरवाही से मजदूरों की जान से खिलवाड़।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व की ढेला रेंज में एक बार फिर अधिकारियों की घोर लापरवाही उजागर हुई है। जिस इलाके में कुछ दिन पहले एक महिला  को बाघ ने मार डाला था, उसी खतरनाक क्षेत्र में आज फिर बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के मजदूरों से सफाई का काम कराया जा रहा है। यह सीधा-सीधा मजदूरों को मौत के मुंह में धकेलने जैसा है।

यह भी पढ़ें 👉  नाबालिगों को गाड़ी देना पड़ सकता है भारी! SSP नैनीताल की अभिभावकों से भावुक अपील, बोले— हादसों के दृश्य रातों की नींद उड़ा देते हैं।

 

 

न मौके पर सुरक्षा दल, न हथियारबंद गश्त, न एम्बुलेंस, न कोई अलर्ट सिस्टम — लेकिन काम पूरा करने का दबाव जरूर! क्या कॉर्बेट प्रशासन मजदूरों को “बलि का बकरा” बनाकर अपने आंकड़े पूरे कर रहा है?

 

 

 

जब ठेकेदार श्याम सिंह से सुरक्षा को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बेहद शर्मनाक और अमानवीय बयान देते हुए कहा —
“जिसकी किस्मत में होगा, वो चला ही जाएगा।”
यह बयान बताता है कि मजदूरों की जिंदगी की कीमत इन लोगों के लिए कुछ भी नहीं है।

यह भी पढ़ें 👉  शिवलालपुर वार्ड नंबर 18 में ट्यूबवेल निर्माण का शिलान्यास, लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या के समाधान की उम्मीद।

 

 

ढेला रेंज के रेंजर से जब इस गंभीर लापरवाही पर जवाब मांगा गया तो वे भी कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। न कोई लिखित आदेश दिखा सके, न सुरक्षा प्रोटोकॉल की जानकारी दे सके।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
👉 जब एक महिला की जान जा चुकी है,
👉 जब इलाका हाई टाइगर मूवमेंट जोन है,
तो फिर मजदूरों को बिना सुरक्षा क्यों भेजा जा रहा है?
क्या कॉर्बेट प्रशासन किसी और मौत का इंतजार कर रहा है?
अब यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि आपराधिक उदासीनता (Criminal Negligence) का बनता है।

यह भी पढ़ें 👉  खाद्य सुरक्षा विभाग पर सवाल! रामनगर में सैंपल तो लिए जाते हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट और मिलावटखोरों पर कार्रवाई का खुलासा आखिर क्यों नहीं होता?

 

 

 

प्रदेश के मुख्यमंत्री, वन मंत्री और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, वरना अगली खबर किसी और मजदूर की मौत की हो सकती है।