बाजपुर तहसील में प्रमाण पत्रों के फर्जीवाड़े पर उठे सवाल, एक पटवारी के निलंबन से आगे जांच की मांग क्या अन्य आईडी से भी जारी हुए प्रमाण पत्र? तहसील स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग।

बाजपुर तहसील में प्रमाण पत्रों के फर्जीवाड़े पर उठे सवाल, एक पटवारी के निलंबन से आगे जांच की मांग

क्या अन्य आईडी से भी जारी हुए प्रमाण पत्र? तहसील स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की उठी मांग।

 

 

उधम सिंह राठौर -प्रधान संपादक

 

बाजपुर। बाजपुर तहसील क्षेत्र में फर्जी और कूटरचित अभिलेखों के आधार पर स्थायी निवास और जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने के मामले में एक पटवारी के निलंबन के बाद कार्रवाई की व्यापकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। 26 सितंबर को उप जिलाधिकारी बाजपुर ने क्षेत्र विराहा के राजस्व उप निरीक्षक मो. अजमल को तहसीलदार की जांच आख्या और स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने के आधार पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।

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हालांकि, इस कार्रवाई के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्रमाण पत्रों से जुड़ा पूरा फर्जीवाड़ा केवल एक ही पटवारी की आईडी तक सीमित था। यदि अन्य आईडी से भी इसी तरह के प्रमाण पत्र जारी हुए हैं तो उनकी भी जांच क्यों नहीं की गई, इसे लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

 

 

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मामले में यह भी चर्चा का विषय है कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पटवारी की रिपोर्ट के बाद उच्च राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी रहती है। ऐसे में जांच का दायरा केवल एक कर्मचारी तक सीमित रखने के बजाय संबंधित प्रमाण पत्रों की पूरी प्रक्रिया, इस्तेमाल हुई आईडी, ऑनलाइन रिकॉर्ड और स्वीकृति के स्तर की जांच किए जाने की मांग उठ रही है।

 

 

 

स्थानीय स्तर पर यह मांग भी सामने आ रही है कि बाजपुर तहसील में जारी संदिग्ध प्रमाण पत्रों का रिकॉर्ड खंगाला जाए और यदि किसी अन्य कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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साथ ही, पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर यह स्पष्ट किए जाने की जरूरत है कि कितने प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए, किन-किन आईडी से आवेदन या प्रमाण पत्र जारी हुए और प्रक्रिया के किस स्तर पर लापरवाही या अनियमितता हुई।

 

 

 

फिलहाल एक पटवारी के निलंबन के बाद मामले की जांच का दायरा कितना बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।