IMPCL निजीकरण के विरोध में उतरी करणी सेना और ब्राह्मण महासभा, कर्मचारियों के आंदोलन को दिया समर्थन।

IMPCL निजीकरण के विरोध में उतरी करणी सेना और ब्राह्मण महासभा, कर्मचारियों के आंदोलन को दिया समर्थन।

 

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

 

रामनगर/मोहान। आयुष मंत्रालय के अधीन संचालित देश के एकमात्र आयुर्वेदिक एवं यूनानी औषधि निर्माण संस्थान आईएमपीसीएल (IMPCL) के निजीकरण के विरोध में आंदोलन को अब सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। मोहान स्थित निगम परिसर में करणी सेना उत्तराखंड एवं अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा उत्तराखंड ने संयुक्त रूप से पहुंचकर कर्मचारियों के आंदोलन को समर्थन दिया।

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संगठनों के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि भारत सरकार के निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) द्वारा आईएमपीसीएल को मात्र 121 करोड़ रुपये में स्काईमैप फार्मा को बेचने का निर्णय लिया गया, जबकि कर्मचारियों की मांग पर कराई गई नवीनतम वैल्यूएशन में निगम की कीमत लगभग 191 करोड़ रुपये आंकी गई है। उनका कहना है कि इस प्रक्रिया से केंद्र सरकार के राजस्व को लगभग 70 करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

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करणी सेना उत्तराखंड की संरक्षक अमिता लोहानी ने कहा कि निगम का निजीकरण न केवल कर्मचारियों के हितों पर चोट करेगा, बल्कि क्षेत्र में रोजगार के अवसर भी प्रभावित होंगे। इससे पलायन जैसी गंभीर समस्या और बढ़ सकती है। उन्होंने मांग की कि निजीकरण की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा वैल्यूएशन और डीपम अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष एवं गहन जांच कराई जाए।

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वक्ताओं ने कहा कि आईएमपीसीएल देश की आयुर्वेदिक और यूनानी चिकित्सा परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण संस्थान है, जिसे बचाना राष्ट्रीय हित में आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने कर्मचारियों और क्षेत्रीय जनता की भावनाओं को नजरअंदाज किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।