
मीट मार्केट में नियमों की खुलेआम धज्जियां, जनता की सेहत से खिलवाड़ पर FDA का शिकंजा।
छह दुकानों की जांच में किसी के पास नहीं मिला खाद्य सुरक्षा लाइसेंस, चार दुकानदार पालिका लाइसेंस के बिना कर रहे थे कारोबार।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। मीट मार्केट में खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच ने मीट कारोबार की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय टीम की जांच में छह दुकानों में से किसी भी दुकान के पास खाद्य सुरक्षा विभाग का अनिवार्य लाइसेंस नहीं मिला। ऐसे में बिना जरूरी खाद्य सुरक्षा अनुमति के लोगों को मीट बेचे जाने की स्थिति सामने आने के बाद आम जनता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मीट मार्केट में औचक निरीक्षण कर दुकानों के लाइसेंस और अन्य दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान सभी छह दुकानों में खाद्य सुरक्षा लाइसेंस का अभाव मिला। वहीं नगर पालिका के स्तर पर भी बड़ी अनियमितता सामने आई। चार दुकानों के पास पालिका लाइसेंस भी नहीं था, जबकि केवल दो दुकानदार ही पालिका का लाइसेंस दिखा सके।
बिना लाइसेंस कारोबार पर सवाल
खाद्य कारोबार के लिए जरूरी लाइसेंस और निर्धारित नियमों का पालन नहीं होना सीधे तौर पर उपभोक्ताओं के हितों से जुड़ा मामला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर बिना जरूरी लाइसेंस के मीट की बिक्री लंबे समय से कैसे चल रही थी और संबंधित विभागों की निगरानी कहां थी।
हालांकि विभाग ने अब कार्रवाई शुरू करते हुए सभी संबंधित दुकानदारों को एक सप्ताह का समय दिया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित अवधि में जरूरी लाइसेंस और दस्तावेज पूरे नहीं किए गए तो खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
अब दूसरे इलाकों की दुकानों की भी होगी जांच
खाद्य सुरक्षा विभाग ने संकेत दिए हैं कि जांच का दायरा अब बढ़ाया जाएगा। गूलरघट्टी, शक्तिनगर और पुछड़ी क्षेत्र की मीट दुकानों का भी निरीक्षण किया जाएगा। इन दुकानों में भी लाइसेंस, दस्तावेज और खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच होगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई के बाद अब बड़ा सवाल यही है कि क्या बिना जरूरी लाइसेंस के संचालित हो रही अन्य मीट दुकानों पर भी इसी तरह सख्ती होगी? आने वाले दिनों में होने वाली जांच से तस्वीर और साफ होगी।








