कार्बेट में वन अपराधों की जांच के लिए वनकर्मियों को मिला कानूनी प्रशिक्षण, छह टीमों ने मौके पर तैयार किया क्राइम सीन।

कार्बेट में वन अपराधों की जांच के लिए वनकर्मियों को मिला कानूनी प्रशिक्षण, छह टीमों ने मौके पर तैयार किया क्राइम सीन।

 

उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक

 

रामनगर, 26 सितंबर। कार्बेट टाइगर रिजर्व में वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा को प्रभावी बनाने और वन अपराधों की जांच में वनकर्मियों की दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से दो दिवसीय विधिक कार्यशाला आयोजित की गई। 25 और 26 सितंबर को कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र, कालागढ़ में आयोजित इस कार्यशाला में 37 प्रशिक्षु वनकर्मियों सहित कालागढ़ उपप्रभाग की विभिन्न रेंजों के 18 वनकर्मियों ने प्रतिभाग किया। कार्यशाला में वन अधिनियमों के क्रियान्वयन, वन अपराधों की जांच और न्यायालय में होने वाली विधिक कार्यवाही की जानकारी दी गई।

 

 

 

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फील्ड डायरेक्टर के निर्देशों और उपनिदेशक के निर्देशन में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ 25 सितंबर को सुबह 11 बजे कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र के वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर रूबाली ने किया। इस दौरान विभागीय अधिवक्ता तरुण बिष्ट ने वन एवं वन्यजीव अपराधों से संबंधित विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जामा तलाशी, बरामदगी के दस्तावेज तैयार करने, बयान दर्ज करने, मौका निरीक्षण, नक्शा तैयार करने, सीजर रिपोर्ट, गिरफ्तारी और अपराधों की जांच के साथ ही न्यायालय में अपनाई जाने वाली विधिक प्रक्रिया के बारे में बताया।

 

 

 

वन आरक्षी वीरेंद्र सिंह ने भारतीय वन अधिनियम, 1927 और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न धाराओं की जानकारी देते हुए वन अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया समझाई।

 

 

 

कार्यशाला के दूसरे दिन 26 सितंबर को कार्बेट वन्यजीव प्रशिक्षण केंद्र के निदेशक बिंदर पाल ने प्रतिभागियों के साथ वन एवं वन्यजीव अपराधों से जुड़े अनुभव साझा किए। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त जानकारी का विभागीय कार्यक्षेत्र में नियमानुसार उपयोग करने पर जोर दिया।

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दूसरे दिन आयोजित फील्ड प्रशिक्षण में प्रतिभागियों की छह टीमें बनाई गईं। सभी टीमों को मौके पर अपराध स्थल तैयार करने, वन अपराध दर्ज करने, बयान लेने, बरामदगी के दस्तावेज तैयार करने और गिरफ्तारी से संबंधित प्रक्रियाओं का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। इसके बाद सभी टीमों ने अपने-अपने कार्य का प्रस्तुतीकरण किया। विभागीय अधिवक्ता तरुण बिष्ट ने प्रस्तुतियों का मूल्यांकन करते हुए कमियों को दूर करने और कानूनी प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन करने की जानकारी दी।

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इस दौरान रामनगर के कोर्ट प्रभारी पार्वतीनंदन जोशी ने भी वन अधिनियमों की विभिन्न धाराओं और वन अपराध दर्ज करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया।

 

 

 

कार्यशाला में वन क्षेत्राधिकारी नंदकिशोर रूबाली, वन पंचायत विशेषज्ञ डॉ. दयाकृष्ण जोशी, मीडियाकर्मी वेदपाल सिंह, वरिष्ठ वन आरक्षी सुनील कुमार, रितेश त्रिपाठी और हरपाल सिंह सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे। कार्यशाला के समापन पर प्रशिक्षु वन आरक्षी रामराज ने सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और प्रशिक्षणार्थियों का आभार व्यक्त किया।

 

 

 

दो दिवसीय कार्यशाला के माध्यम से वनकर्मियों को वन एवं वन्यजीव अपराधों की जांच से जुड़ी कानूनी और व्यावहारिक प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण दिया गया, जिससे विभागीय कार्यवाही को नियमानुसार संपन्न कराने में मदद मिलेगी।