
कॉर्बेट में साहित्य का महाकुंभ, तीन दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल संपन्न, प्रकृति, संस्कृति और वन्यजीव संरक्षण पर देशभर के लेखकों ने साझा किए विचार।
उधम सिंह राठौर – प्रधान संपादक
रामनगर। कॉर्बेट की धरती पर आयोजित प्रथम कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल का तीन दिवसीय आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। साहित्य, प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण को समर्पित इस अनूठे आयोजन में देश के जाने-माने लेखकों, वक्ताओं और साहित्य प्रेमियों ने प्रतिभाग कर प्रकृति एवं पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए।
फेस्टिवल की प्रमुख थीम नेचर राइटिंग, वन्यजीव, हिमालय, उत्तराखंड की संस्कृति और यहां के पारंपरिक व्यंजनों पर केंद्रित रही। आयोजन के दौरान हिमालय के संरक्षण, नदियों के महत्व, पर्यावरणीय चुनौतियों और वन्यजीव संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। वक्ताओं ने साहित्य और रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने पर जोर दिया।
आयोजक ने बताया कि कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल आयोजित करने का विचार पिछले करीब दो वर्षों से उनके मन में था। कॉर्बेट देश का पहला राष्ट्रीय उद्यान है और भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत भी वर्ष 1973 में यहीं से हुई थी। ऐसे ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व वाले क्षेत्र में साहित्यिक महोत्सव आयोजित करना उनके लिए विशेष महत्व रखता है।
उन्होंने कहा कि सही टीम और सार्थक विषयों के साथ इस आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न करना खुशी की बात है। फेस्टिवल के दौरान कई महत्वपूर्ण अनुभव और सीख मिलीं। उन्होंने इसमें शामिल हुए सभी लेखकों, वक्ताओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने की उम्मीद जताई।
कॉर्बेट लिटरेचर फेस्टिवल को क्षेत्र में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने और प्रकृति संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि साहित्य और प्रकृति का जुड़ाव समाज को पर्यावरण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।







